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कृषि विद्यार्थियों के लिए वेबिनार श्रृंखला का आयोजन सराहनीय: डॉ. सेंगर

रायपुर (जनसम्पर्क विभाग)। भारत में कृषि उच्च शिक्षा के विकास एवं सुदृढ़ीकरण हेतु इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय वेबिनार श्रृंखला का आज यहां समापन किया गया। समापन दिवस पर महाविद्यालयीन छात्रों ने अवसाद का प्रबंधन विषय पर वेबिनार आयोजित किया गया। समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. एस.एस. सेंगर थे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि कृषि महाविद्यालय, रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. एम.पी. ठाकुर थे एवं अध्यक्षता अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. (मेजर) जी.के. श्रीवास्तव ने की। आज के वेबिनार की मुख्य वक्ता मनोचिकित्सक डॉ. अम्बा सेठी ने महाविद्यालयीन विद्यार्थियों में अवसाद के कारणों, लक्षणों, निदान एवं उपचार के संबंध में व्याख्यान दिया। उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के वित्तीय सहयोग से कृषि छात्र-छात्राओं के लिए 01 से 09 फरवरी तक विभिन्न विषयों पर वेबिनार श्रृंखला का आयोजन किया गया।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. एस.एस. सेंगर ने कहा कि अधिष्ठाता छात्र कल्याण द्वारा विभिन्न कृषि महाविद्यालयों के विद्यार्थियों हेतु विभिन्न उपयोगी विषयों पर वेबिनार श्रृंखला का आयोजन एक सराहनीय प्रयास है। इन वेबिनारों में विषय विशेषज्ञों द्वारा कृषि छात्रों के लिए कैरियर एवं व्यवसाय की सम्भावनाएं, कृषि छात्रों के लिए सिविल सर्विसेस की तैयारी, विद्यार्थियों की शारीरिक तंदरूस्ती एवं मानसिक स्वास्थ्य, कृषि विद्यार्थियों के लिए विदेशी शिक्षण संस्थानों में अध्ययन की सम्भावनाएं, सड़क सुरक्षा जागरूकता तथा महाविद्यालयीन छात्रों में अवसाद प्रबंधन जैसे छात्रोपयोगी महत्वपूर्ण विषयों पर सारगर्भित जानकारी दी गई। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह वेबिनार श्रृंखला विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, क्षमता निर्माण तथा कैरियर विकास हेतु उपयोगी साबित होगी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. एम.पी. ठाकुर ने कहा कि इस वेबिनार श्रृंखला में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अलावा देश के अन्य विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी भी शामिल हुए।

वेबिनार की मुख्य वक्ता सलाहकार मनोचिकित्सक डॉ. अम्बा सेठी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व की लगभग 5 प्रतिशत आबादी अवसाद ग्रस्त है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयीन छात्रों में अवसाद की समस्या बढ़ती जा रही है। तनाव, चिन्ता, उदासी, गुमसुम तथा एकाकी रहना और व्यवहार में अनापेक्षित परिवर्तन अवसाद के प्रमुख लक्षण हैं। अवसाद के कारण विद्यार्थियों की मानसिक एकाग्रता में कमी, गुस्सा एवं चिड़चिड़ापन भी देखा जाता है। उन्होनंे कहा कि अवसाद के जैविक, मानसिक तथा सामाजिक कारक होते हैं। डॉ. सेठी ने कहा कि अवसाद के लक्षणों की त्वरित पहचान एवं निदान कर इनका जल्द से जल्द उपचार किया जाना आवश्यक है। उन्होने कहा कि अवसाद के प्रबंधन में शारीरिक व्यायाम, योग, ध्यान, अच्छा पोषण, अच्छी नींद, धूप का सेवन तथा पारिवारिक सहयोग अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद लाभ न होने पर मनोचिकित्सक से परामर्श एवं उपचार करवाना चाहिए। इस वेबिनार श्रृंखला का समन्वय डॉ. जेनू झा, डॉ. दीप्ति झा, डॉ. प्रताप टोप्पो, डॉ. सुबुही निषाद, डॉ. आर.के. ठाकुर एवं डॉ. आशुलता कौशल ने किया। समापन समारोह में फल विज्ञान संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रभाकर सिंह एवं वानिकी संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. लालजी सिंह सहित अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित थे।

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