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09/10/2026

(1)
रस बिना पानी नहीं मानवता बिना पत्रकारिता क्यों
दुनिया भर के पत्रकर
कहते हैं खुद को सच्चाई का पक्षकार
मानते हैं खुद को प्रगति का पहरेदार
न्याय के लिए लगाते फिरते हैं ललकार
दावा करने में नहीं करते तनिक सी देर
निष्पक्ष हैं हम सेर क्या पूरा सवा सेर
अन्याय और अत्याचार को कर देंगे ढेर
कहते फिरते हैं सच आएगा सामने देर-सबेर
पूछते रहते हैं कब खत्म होगी अन्धेर
क्या यह सब सच नहीं पत्रकारिता जगत के कुबेर।
पत्रकार वह है जो हो खुद्दार
पत्रकार वह है जो हो दिलदार
जिसमें सच्चाई की जड़ तक जाने का हो होंसला अपार
निजी स्वार्थ की गठरी को गाड़ दे जो गड्ढे में दमदार
पूरे देश को समझे जो अपना घर-परिवार
देश पर आँच आने से पहले हो जाए जो खबरदार
उसका पक्ष ले जो देश के लिए मर-मिटने को हो तैयार
चलाए कलम उठाए आवाज़ कि खुशहाल हो पूरा संसार।
नारद मुनि बनने से काम नहीं है चलने वाला
पोस्ट-मैन की भूमिका में रहने से कुछ नहीं होने वाला
सरहदों पर डटे जवानों और असली पत्रकार में कोई अन्तर नहीं
बस उनके हाथों में बन्दूक है पत्रकारों के हाथों में है कलम
इसलिए बदल डालो पत्रकारिता के जर्जर-बेकार उसूल सँवार लो मानव-जनम।
कहोगे कि यह सब आदर्श है
कहोगे कि यह सब व्यवहार में सम्भव नहीं
स्वार्थ और भोग में डूबे पत्रकारों के लिए यह तर्क सही है
मगर देश के लिए जीने वाले पत्रकार के लिए यह सब सहज है।
पत्रकार और व्यक्ति होने के नाते
कर दो एक दिन काम का बहिष्कार
दुनिया के पत्रकारों को जता दो पत्रकार-बिरादरी का दारोमदार
कहो ड्रैगनिस्तान को तिब्बत से पलायन करे
इक्कीसवीं सदी में धरती को दासता के कलंक से मुक्त करे
चेता दो अधिनायकवादी ड्रैगनिस्तान को
दूसरों की धरती पर वह बदनीयत न धरे
करोगे ऐसा भारतवर्ष के सुविधा भोगी पत्रकारो
सवाल ही पैदा नहीं होता कि आप लोग कुछ ऐसा कर गुजरें
संसार के सामने भारत की उजली तस्वीर उकेर डालें।
यह काम तो देश की सरकार का है
ऐसा सुझाव पागलपन वाला और बेकार का है
फिर संयुक्त राष्ट्र संघ किस काम का है
ऐसे कुतर्क उठाकर हा हा–ही ही–हू हू– करोगे
इसे किसी तरह का फ्रस्ट्रेशन कहोगे
पर बताओ तो बात कथित जिम्मेदार बुद्धिजीवियो ज़रा
आप लोग भारत के नागरिक नहीं हो क्या
विश्व-बिरादरी का हिस्सा नहीं हो क्या
बस, नेताओं और नेत्रियों की कमियाँ भुनाते रहोगे
अपने खुद के ऐब छिपाते रहोगे।
(2)
कुछ-कुछ पुलिस वाले होते हैं निराले
अगर करें पुलिस वाले ड्यूटी पर ठुमक-ठुमक कर डांस
तो उन्हें लगातार रात-दिन बिना सोए काम करने का दो चांस
लाइन हाजिर कर देना है आपका खास अधिकार
किन्तु, इस तरह नहीं होगा पुलिस वालों में सुधार
किसी पुलिस वाले का कवि होना
किसी का कलाकर होना या होना नृत्यकार
यह तो है बहुत बढ़िया बात सुनो मेरी सरकार
पुलिसवालों के तनाव भरे जीवन में
तनातनी, धक्का-मुक्की और भागमभाग वाली ड्यूटी में
मनोरंजन के काम आएंगे कभी-कभी ऐसे जन्मजात फनकार
हाँ यदि मदिरा पीकर करें ऐसा तो है फिर उनको धिक्कार।
रामकृष्ण प्रदेश के दो पुलिस वाले नाच में
दे रहे थे दबंग वाले सलमान को मात
कह गए विद्वान लायक की कभी मत पूछो जात
एक पुलिसवाले की तो कैसी लचकदार है गात
ये लोग तो हैं पुलिस विभाग के लिए दरअसल सौगात
ऐसे ही पुलिस वाले मौके पर साबित होते है दमदार
पनिसमेंट के तौर-तरीके रचनात्मक हों तो बेहतर
तभी तो अच्छे पुलिस वाले पैदा होंगे घर-घर।
पंजाब के एक पुलिसवाले का गायन देखा शानदार
देशभक्ति से भरा उनका गाना था जायकेदार
वे भी तो वर्दी में ही कर रहे थे खयाल का इजहार
सच कहा किसी ने मौके की नजाकत को समझो रे समझदार
वर्ना जीत की जगह चखनी पड़ती है करारी हार
जीवन बन जात है भार
दूर चला जाता है पास आता गले का हार।
-सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला, स्वतंत्र पत्रकार, देहरादून।
The National News