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mulayam singh yadav

कथित सेकुलर-समाजवादी मुलायम के दो कठोर प्रहार (मधुशाला की तर्ज पर)

mulayam singh yadav

virendra

B. of Journalism
M.A, English & Hindi
सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला द्वारा रचित- 
Virendra Dev Gaur Chief Editor (NWN)

मुलायम की डायरी में 2 नवम्बर 1990 और 2 अक्टूबर 1994

मुलायम जी हम समझ न पाए किस पदार्थ का बना है आपका समाजवादी प्याला
किसने बनाई कब बनाई और आपको कब पिलाई सेकुलरवादी राम-विरोधी हाला
क्या कभी आपने पढ़ी है हरिवंश राय बच्चन जी की मधुशाला
जिसमें कूट-कूट कर भरी है शुरू से अन्त तक सच्चाई की हाला।

यह तो साफ हो चुका है नेता जी इतिहास आपके लिए है शैतान की खाला
काश! आपने चखी होती पृथ्वीराज चौहान महाराणा प्रताप और शिवाजी महाराज की प्रिय हाला
आपने तो पढ़ी समझी और आत्मसात कर ली सत्ता की बदचलन मधुशाला
आपका पूरा सम्मानीय कुटुम्ब नेता जी दास है उसका जिसे कहते हैं सत्ता की हाला।

आपने छाती फुलाकर 2 नवम्बर 1990 के दिन बतौर मुख्यमंत्री कम से कम 16 रामभक्तों को मार डाला
आपने नेता जी 2 अक्टूबर 1994 की रात रामपुर तिराहे पर कत्लेआम और नारी मान-मर्दन का लोमहर्षक कांड रच डाला
बदरी-केदार प्रदेश (उत्तराखंड) के राज्य-आन्दोलन और राम-कृष्ण प्रदेश (यूपी) के श्रीराम आन्दोलन में आपने रेकार्ड बना डाला
नेता जी मक्का ओर अयोध्या में से आपने मक्का को चुना आपका नाम इसलिए लोगों ने मौलवी मुलायम रख डाला।

आप खुद सोचिएगा नेता जी क्या किसी अदालत या देश के संविधान की किसी धारा ने आपके गिरेबान में हाथ डाला
आपको आपकी शौर्य-गाथाओं के लिए कथित सेकुलरवादियो ने देश का रक्षामंत्री बनाया ऐसी है राजनीति की कैकेयी-हाला
अफसोस! किसी ने नैतिक साहस नहीं जुटाया आपको कारागार में नहीं डाला
जय समाजवाद जय सेकुलरवाद जय-जय राजनीति की अद्भुत पैशाचिक मधुशाला।

1526 में भी मक्का जीता और अयोध्या धाम हारा बाबर पी गया प्याला पर प्याला
1990 में भी मक्का जीता और अयोध्या धाम हारा खूब छलकी सेकुलरवाद की हाला
राष्ट्र-धर्म के अनुयायी मलते रह गए हाथ किटकिटाते रह गए दाँत पलट गया प्याला
राम-राम रटते-रटते सामर्थ्य खो चुके हैं राममार्गी कैसे पहुँचेंगे बहुत दूर है मधुशाला

6 दिसम्बर को कुछ ऐसा हो जाए अयोध्या में अयोध्या जीत जाए मिल जाए राम की हाला
अपने मौलिक हक़ के लिए सच्चे राम भक्तो उठा लो प्याला पर प्याला पीओ राम की हाला
श्री राम राष्ट्र के आदि नायक है संस्कृति के परिचायक हैं निकल पड़ें पाने को मधुशाला
सच्चे सेकुलरवादियो ओ राष्ट्रवादियो करना ज़रूरी है तसल्ली से झूठ का मुँह काला।

राम राज्य के बिना नहीं संभव भारत माता की संतानो पाना परम सुखदायी मधुशाला
सत्य के लिए भारत की धरती से सुखानी है झूठे सेकुलरवादियों की दुखदायी जिहादी हाला
वामंपथियों झूठे सेकुलरवादियों ने तो राष्ट्रीय अस्मिता के मुद्दों को सदैव ही दुतकारा और टाला
प्रण कर लो कमर कस लो इनका राम भक्तों से पड़ा गया है पाला।
                                                                                     -जय भारत

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