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हार्दिक पटेल दोषी करार, दो साल की सजा

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अहमदबाद । गुजरात के पाटीदार अनामत आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को बुधवार को तगड़ा झटका लगा। वर्ष 2015 में बीजेपी विधायक के दफ्तर पर हमला मामले में राज्य की एक अदालत ने हार्दिक पटेल और उनके दो अन्य साथियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने पटेल को दो साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा उन्हें बीजेपी विधायक को एक लाख रुपये मुआवजा भी देना होगा। मेहसाणा के विसनगर में 23 जुलाई 2015 बीजेपी के विधायक ऋषिकेश पटेल के कार्यालय में तोडफ़ोड़ किया गया था। इससे पहले मेहसाणा की जिला अदालत ने 2015 में पटेल के ऑफिस पर हुए हमले के मामले में हार्दिक पटेल और लालजी पटेल के खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया था। अब अदालत ने हार्दिक पटेल और लालजी पटेल को दोषी ठहराया है।  मेहसाणा के जिस विसनगर की अदालत ने हार्दिक के खिलाफ फैसला दिया है, वह साल 2015 में हुए पाटीदार अनामत (आरक्षण) आंदोलन का प्रमुख गढ़ रहा था। हार्दिक पटेल के नेतृत्व में हुए इसी आंदोलन के दौरान बीजेपी विधायक के दफ्तर को निशाना बनाया गया था। बताते चलें, हार्दिक पटेल के खिलाफ फैसले के बाद अब इस पर राजनीति तेज होने की संभावना है।  कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब 25 अगस्त से हार्दिक पटेल सरकारी नौकरियों और शिक्षा में अपने समुदाय के सदस्यों को आरक्षण की मांग पर जोर देने के लिए वह 25 अगस्त से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आमरण अनशन उनकी अंतिम जंग होगी। पटेल ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर पोस्ट विडियो संदेश में कहा कि अपने समुदाय के सदस्यों के लिए आरक्षण प्राप्त करना उनकी प्राथमिक चिंता है।  उन्होंने कहा, ‘यह हमारी आखिरी लड़ाई है। या तो मैं अपनी जान दे दूंगा या हम आरक्षण प्राप्त करेंगे। इसके लिए हमें आपके समर्थन की जरूरत है। यह लड़ाई आखिरी चरण में आ गई है। यह आमरण अनशन मेरी अंतिम जंग की तरह होगी। हार्दिक ने कहा, आरक्षण हमारा प्राथमिक मुद्दा है और हम इसके लिए लडऩा जारी रखेंगे। 25 अगस्त को पाटीदार क्रांति दिवस के तौर पर मनाया जाता है और मैं उस दिन से आमरण अनशन पर बैठूंगा। हमें आरक्षण मिलेगा, लेकिन तभी जब हम एक साथ आकर इसके लिए लड़ेंगे। हम आपसी झगड़े की वजह से काफी पीछे होते जा रहे हैं।


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