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नेत्रदान के लिये संकल्पपत्र भरकर दूसरों की जिन्दगी को रंगीन बनाने में अपना योगदान प्रदान करें- पूज्य स्वामी चिदानन्द

राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा
स्वेच्छा से करे नेत्रदान का संकल्प

नेत्रदान के लिये संकल्पपत्र भरकर दूसरों की जिन्दगी को रंगीन बनाने में अपना योगदान प्रदान करें

जीते-जीते रक्त दान और जाते-जाते नेत्रदान एवं अंगदान-पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज
ऋषिकेश। आज 36 वाँ राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने देशवासियों से आह्वान किया कि नेत्रदान महादान है, आईये आज से 8 सितंबर तक चलने वाले नेत्रदान पखवाड़ा में नेत्रदान का संकल्प पत्र कर जो देख नहीं सकते उनकी जिन्दगी को रोशन करने का संकल्प लें।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भारत दानवीरों का ही नहीं बल्कि पूरा शरीर दान करने वालों का देश है। भारत का सौभाग्य है कि महर्षि दधीचि जैसे ऋषि इस देश में हुये जिन्होंने असुरों से जन सामान्य की रक्षा के लिये अपना देहदान कर दिया था। हमारे पूर्वजों का अनुकरण कर हम भी नेत्रदान करके दूसरे किसी व्यक्ति की जिंदगी में नई रोशनी और नई उम्मीदों का सवेरा रोशन कर सकते हैं। नेत्रदान करने से हम मृत्यु के बाद भी जीवित रह सकते है और यह दूसरों के लिये भी प्रेरणादायी होगा। नेत्रदान करना उदारता और सेवा का द्योतक है, जिससे न केवल हमें बल्कि दूसरे को भी खुशी मिलेगी। हमारे नेत्रदान करने से किसी की पूरी जिन्दगी रोशन हो सकती है यह पखवाड़ा यही शिक्षा देता है। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आंकडों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष ही नहीं बल्कि प्रतिदिन अनेक लोग नेत्र प्रत्यारोपण के लिये प्रतीक्षा कर रहे हैं। नेत्र प्रत्यारोपण की मांग और नेत्रदान की संख्या के बीच एक बड़ा अंतर है इसलिये नेत्र (कॉर्निया) दान के लिये जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। भारत में नेत्र दान को लेकर जनसाधारण को शिक्षित व जागरूकता करना अत्यंत जरूरी है। नेत्रदान और अंग दान करने से मृत्यु के बाद भी हम अपने शरीर का बेहतर उपयोग कर सकता है। मृत्यु के बाद नेत्रदान और अंगदान कर दूसरों को खुशी देकर भी हम जीवित रह सकते है इसलिये जरूरी है जीते-जीते रक्त दान और जाते-जाते नेत्रदान एवं अंगदान।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि जब किसी के शरीर का कोई अंग निष्प्राण हो या ठीक से कार्य नहीं कर रहा हो और वो भी आँखें तो वह व्यक्ति इस बेहद खूबसूरत दुनिया और प्रकृति का आनन्द उस प्रकार नहीं ले सकता जिस प्रकार आखों वाले लेते है इसलिये अगर हमारी आँखों से कोई दृष्टि सुख लें पाये तो यह बहुत ही महान कार्य हो सकता है। आईये इस नेत्रदान पखवाड़ा में नेत्रदान का संकल्प लें और किसी के जीवन को रोशन करने हेतु सहयोग प्रदान करें।

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