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एक-दूसरे के स्कूल में टीचर जाकर पढ़ा भी सकेंगे

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देहरादून (संवाददाता)। अब स्कूल प्रबंधन बेहतर शिक्षा देने के लिए केवल अपने संसाधनों पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि आसपास के स्कूलों से संसाधन लेकर भी गुणवत्ता सुधार के लिए कदम उठा सकेंगे। इसमें एक-दूसरे के स्कूल में टीचर पढ़ाने से लेकर विज्ञान प्रदर्शनी जैसे कदम उठाये जा सकेंगे। इस संबंध में सीबीएसई ने एक सरकुलर स्कूलों को जारी किया है। इसके बाद कुछ स्कूलों ने मिलकर ‘लर्निंग हबÓ बना भी लिए है। अब चार से छह स्कूल एक- दूसरे के बेहतर संसाधनों का मिलकर इस्तेमाल कर सकेंगे। इसमें लैब का इस्तेमाल से लेकर दूसरे संसाधनों का उपयोग तक शामिल है। साथ ही विज्ञान प्रदर्शनी, सेमिनार, वर्कशाप करने से लेकर सामाजिक कार्यक्रम करने तक में आपसी सहयोग से कर सकेंगे। यही नहीं एक-दूसरे के स्कूल में टीचर जाकर शिक्षा भी दे सकेंगे। अगर कोई स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता के लिए कोई योजना लागू करता है, तो वह दूसरे स्कूल को भी प्लान दे सकेगा। साथ में भविष्य में कैसे और मिलकर अध्ययन/अध्यापन का कार्य अच्छा किया जा सके, उसकी मिलकर प्लानिंग करने से लेकर लागू करने में सहयोग करेंगे। टीचर की स्किल में सुधार के लिए भी कदम उठाया जा सकेगा। इसके साथ ही स्टूडेंट भी दूसरे के स्कूलों में पढ़ाई करने के साथ एजूकेशन टूर पर भी जा सकेंगे। सीबीएसई ने जुलाई-2019 तक व्यवस्था को लागू करने का निर्देश दिया है, इसके क्रम में कदम उठाये जा रहे हैं। कई स्कूलों के साथ बातचीत कर लर्निंग हब बना लिया है। इस व्यवस्था के लागू होने से एक-दूसरे स्कूल से नई चीजों को सीखने के साथ सुधार की दिशा में कदम उठाया सकेगा।

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