रुदप्रयाग । जिला मुख्यालय में स्थित मांस विक्रेताओं पर भी नगरपालिका, प्रशासन और पुलिस का डंडा चलना शुरू हो गया है। जिला मुख्यालय की सभी मांस की दुकानें बंद करा दी गई हैं। अग्रिम आदेशों तक मांस की दुकानें बंद रहेंगी। कई मांस विक्रेताओं की दुकानों के लाइसेंस पिछले वर्ष ही समान्त हो गये थे, लेकिन कई माह का समय गुजर जाने के बाद भी मांस विक्रेताओं ने अपनी दुकान के लाइसेंस रेन्यू नहीं करवाये।
दरअसल, जिला मुख्यालय के नये बस अडडे और मुख्य बाजार में संचालित हो रही मांस की दुकानों के कारण काफी गंद्गी हो रही है। मांस विक्रेता गंद्गी को पुनाड़-गदेरे में डाल देते हैं और यह गंद्गी आगे चलकर अलकनंदा नदी में समाहित हो जाती है। जिस कारण स्थानीय जनता के साथ ही देश-विदेश से यहां पहुंचने वाले यात्रियों की आस्था को भारी ठेस पहुंचती है। इतना ही नहीं सभी मांस की दुकानों में बकरे और मुर्गे बिना स्वास्थ्य प्रशिक्षण के ही उपभोक्ताओं को बेचे जाते हैं। कही भी सल्टर हाउस नहीं है। नियमों के अनुसार स्वास्थ्य प्रशिक्षण के बाद ही बकरों एवं मुर्गों को काटा जाना चाहिये, लेकिन यहां सब नियमों के खिलाफ हो रहा है।
देर सांय को सभी मांस की दुकानों को बंद कराकर लाइसेंस कोतवाली में जमा किये गये। अब उन्हीं मांस विक्रेताओं की दुकानें खुलेंगी, जिनके पास लाइसेंस होंगे। बिना लाइसेंस वाली दुकानों को निरस्त किया जायेगा। यदि कोई भी मांस विक्रेता अब बिना स्वास्थ्य प्रशिक्षण के बकरें एवं मुर्गे काटता है तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई होगी।
The National News
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