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उत्तराखंड सरकार की बढ़ती चुनौतियाँ चुस्त करनी पड़ेंगी रणनीतियाँ

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     ठेली वालों, सब्जी वालों, फल वालों, दूध वालों और दुकानदारों की स्क्रीनिंग जरूरी

                    (उत्तराखंड सरकार की कोरोना-परीक्षा)

कोरोना संकट पल-पल भयावह होता जा रहा है। उत्तराखंड को हर पल सचेत और सावधान रहने की जरूरत है। राज्य सरकार को तुरन्त नेपाल और चीन की सीमा पर चौकसी जितना अधिक हो सके बढ़ा देनी चाहिए। देश कोरोना के दो-तरफा संकट में फँसा है। पड़ोसी जेहादिस्तान (पाकिस्तान) कोरोना से लड़ाई हार रहा है। वह ऐसे नाजुक समय में भारत के खिलाफ अपने छद्म जिहादी युद्ध को कोरोना वायरस की मदद से विकराल बना सकता है। ऐसा करके वह अपने दिल पर लग रहे जख्मों पर मलहम लगाने की फिराक में है। वह न केवल कब्जाए हुए कश्मीर, पंजाब और नेपाल की और से जेहाद की जंग को वायरस की सहायता से कई गुना घातक बना सकता है बल्कि वह तरह-तरह के शैतानी पैंतरे आजमाकर भारत की कोरोना के खिलाफ लड़ाई को कमजोर कर सकता है। मौजूदा हालातों पर नजर ड़ाले तो ऐसा लगता है कि जेहादिस्तान इस रणनीति को बहुत आगे बढ़ा चुका है। इसके मद्देनजर उत्तराखंड की बढ़ती चुनौतियों को लेकर राज्य सरकार को चुस्ती और फुर्ती से काम लेना होगा अन्यथा राज्य के साथ-साथ देश की समस्या बढ़ जाएगी और कोरोना-काल हम पर हावी हो जाएगा। उत्तराखंड को अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं और नियंत्रण रेखाओं के साथ-साथ देश के भिन्न-भिन्न राज्यों की सीमाओं पर पैंनी नजर रखनी पड़ेगी।
     यही नहीं बल्कि यहाँ एक और व्यवहारिक सुझाव दिया जाना देशहित में जरूरी समझा जा रहा है। दिल्ली के मरकज में तबलीगियों ने भारत के खिलाफ एक भयानक षंड़यंत्र किया। जिसके और अधिक सबूत तलाशना नादानी है। यह तबलीगी अपने जेहादी मिशन से भारत को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुँचाने की रणनीति पर काम कर रहे है। दूसरी तरफ से पड़ोसी जेहादिस्तान इन तबलीगियों का भरपूर फायदा उठाकर प्रधानमंत्री मोदी के कोरोना विरोधी अभियान को तार-तार कर देने की फिराक में जुटा है। इसलिए राज्य सरकार को ही नहीं बल्कि पूरे देश को यह सुझाव दिया जा रहा है कि मेक्रो के साथ-साथ माइक्रो स्क्रीनिंग टैस्ट का व्यापक अभियान रात-दिन चलाया जाना चाहिए। ठेली वालों, सब्जी वालों, फल वालों सहित तमाम दुकानदारों की बार-बार कोरोना स्क्रीनिंग की जाए। तबलीगी जमात के लोग ठेली वाले बनकर हमें बहुत बड़ी हानि पहुँचा सकते हैं। दिन-रात स्क्रीनिंग कोई ऐसा अभियान नहीं है जिसे चलाया नहीं जा सकता है। इसके लिए सरकारें डॉक्टरी कर रहे छात्रों, नर्स का कोर्स कर रहे छात्र-छात्राओं और यहाँ तक सिविल डिफेंस के लोगों की सहायता ले सकती हैं। इस अभियान के लिए एनसीसी कैडेट्स भी कारगर सिद्ध हो सकते हैं। इनके सचल दस्ते रात-दिन पुलिस को साथ लेकर स्क्रीनिंग कर सकते हैं। जिसके लिए इन्हें प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
       जेहादिस्तान के भेजे हुए जेहादी इस संकट काल में भारत को झकझोर कर रख सकते है। वे सीमा पार से और सीमा के अंदर आकर हमें क्षति पहुँचा सकते है। तबलीगी जेहादी कोई भी हथकंडा अपना सकते हैं। वे सब्जी बेचने वाला बनकर, फल बेचने वाला बनकर, दूध वाला बनकर कोरोना वायरस को फैला सकते है। ऐसे खतरनाक जेहादी पतंग उड़ाकर, पतंग के माध्यम से भी कोरोना वायरस फैला सकते है। पतंग में कुछ ऐसी सामग्री होती है जो वायरस का ढुलान करने में सक्षम है। लिहाजा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री जोकि इस कोरोना युद्ध में धीर-गम्भीर रहकर मोर्चा सँमाले हुए हैं- वे समग्र रूप से चौकस रहकर न केवल उत्तराखंड की नैया को पार लगा सकते है बल्कि पूरे देश की मदद कर प्रधानमंत्री मोदी के संसार-व्यापी कोरोना विरोधी अभियान के एक महानायक बनकर उभर सकते हैं।
                                         धन्यवाद।                                                                  सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला, देहरादून

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