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ट्रेनों की लेटलतीफी पर अब ब्रेक लगाने की कवायद

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नई दिल्ली । ट्रेनों की लेटलतीफी को लेकर जून में मचे हंगामे के बाद रेल मंत्रालय की ओर से उठाए गए कदमों का कुछ असर नजर आने लगा है। पिछले महीने के मुकाबले इस माह में अब तक ट्रेनों की पंचुएलिटी में सुधार हुआ है। पिछले महीने जहां लगभग 60 फीसदी ट्रेनें ही वक्त पर चल रही थीं, वहीं अब वक्त पर चलने वाली ट्रेनों की तादाद में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि अभी भी 29 फीसदी ट्रेनें अपने तय वक्त से देरी से चल रही हैं। इंडियन रेलवे के सूत्रों का कहना है कि पिछले माह जिस तरह से ट्रेनों की लेटलतीफी की वजह से रेलवे को पैसेंजरों की नाराजगी का सामना करना पड़ा है, उसके बाद रेलवे की ओर से जो कदम उठाए जा रहे हैं, उसकी वजह से वक्त पर चलने वाली ट्रेनों की संख्या में कुछ सुधार हुआ है। हालांकि अब रेलवे की कोशिश है कि अगले डेढ़ माह के भीतर ट्रेनों की पंक्चुएलिटी में सुधार करके उसे 80 फीसदी तक लाया जाए यानी की 80 फीसदी ट्रेनें अपने तय वक्त पर चलें और तय वक्त पर ही पहुंचें। रेलवे बोर्ड के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक जून में जब 40 फीसदी से अधिक ट्रेनें देरी से चलने पर जब हंगामा हुआ तो इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इसका संज्ञान लिया। इसके बाद रेलवे ने इस पर फोकस किया। इससे पहले रेलवे की ओर से यह लगातार दावा किया जा रहा था कि चूंकि पुराने ट्रैक मेंटीनेंस का कार्य चल रहा है इसलिए ट्रेनें लेट हो रही हैं। उस वक्त तक रेलवे अधिकारी यह मानकर चल रहे थे कि मेंटीनेंस की वजह से अगर ट्रेनें लेट चलती हैं तो भी केंद्र सरकार का उन्हें समर्थन मिलता रहेगा। लेकिन जब ट्रेनों की लेटलतीफी को लेकर हंगामा बरपा तो इसके बाद रेलवे को अपना फोकस बदलना पड़ा। अब रेलवे न सिर्फ यह दावा कर रहा है कि वह मेंटीनेंस पर ध्यान देगा बल्कि ट्रेनें भी सही वक्त पर चलाने का प्रयास करेगा। इसके बाद अब रेलवे इस बात की भी निगरानी कर रहा है कि मेंटीनेंस के लिए जो वक्त तय किया गया है, उतने वक्त में ही मेंटीनेंस करके ट्रेनें चलाई जाएं। इसके अलावा अब मेंटीनेंस के लिए वक्त तय करने से पहले यह भी देखा जा रहा है कि क्या वाकई में मेंटीनेंस में इतना ही वक्त लगेगा या कम वक्त में हीउस कार्य को किया जा सकता है। इसके अलावा अब पंक्चुएलिटी को लेकर लगातार बैठकें भी हो रही हें और रोजाना ट्रेनों की टाइमिंग को लेकर मॉनीटरिंग भी की जा रही है। जिसकी बदौलत अब पंचुएलिटी में कुछ सुधार हुआ है।  रेलवे का कहना है कि गाजियाबाद मुगलसराय जैसे कुछ सेक्शन ऐसे हैं, जहां पटरियों की क्षमता के मुकाबले ट्रेनें काफी अधिक हैं, वहां जरूर अभी इस तरह की समस्या रह सकती है लेकिन अन्य सेक्शन में मेंटीनेंस की व्यवस्था ऐसी की जा रही है कि ट्रेनों को कम से कम डिटेन करना पड़े।

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