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? संतुलित पोषण और तनावमुक्त जीवन में छुपा है सेहतमंद दिल का राज – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

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❤️ *विश्व हृदय दविश्व हृदय दिवस

?‍♀️ *योेग करो, रोजयोेग करो, रोज करो, मौज करो

? *दिल का राज है दिल से जियो

?‍❤️‍?‍? *जब भी मिले, जिससे जब भी मिले, दिल से मिले

? *जीवन शैली को बदलें, दिल स्वस्थ रहेगा

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देहरादून/ऋषिकेश (दीपक राणा) । परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने विश्व हृदय दिवस के अवसर पर संदेश देते हुये कहा कि संतुलित पोषण, नियमित योग और तनावमुक्त जीवन में छुपा है दिल को सेहतमंद रखने का राज। शरीर का सबसे अहम हिस्सा है हृदय, जो की निरंतर कार्य करता रहता है, इसलिये हृदय के प्रति जनसमुदाय को जागरूकता करने तथा हृदय संबंधी समस्याओं से बचने के लिए प्रतिवर्ष 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। वर्तमान समय में भारत सहित विश्व के कई देशों में हार्ट पेशेंट्स की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। आकंडों के अनुसार हृदय रोग केवल उम्र दराज लोग को ही नहीं बल्कि कम उम्र के बच्चों को भी हो रहा है। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आहार-विहार और विचार को संयमित कर हृदय रोग ही नहीं बल्कि कुछ अन्य रोगों से बचा जा सकता है।

विश्व हृदय दिवस मनाने की शुरूआत सन 2000 में की गई थी। हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार हृदय से सम्बन्धित बीमारियां किसी भी उम्र में हो सकती हैं, इसके लिए कोई निर्धारित उम्र नहीं होती। महिलाओं में हृदय रोग की संभावनाएं ज्यादा होती हैं। हृदय, शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है फिर भी इससे संबन्धित होने वाली बीमारियों के जोखिमों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, इसीलिए विश्व हृदय दिवस के माध्यम से जनसमुदाय को यह संदेश दिया जाता है कि हृदय की बीमारियों के प्रति सचेत रहें।
वर्तमान लाइफ स्टाइल, खान-पान और तनाव की वजह से हार्ट अटैक के मामले बढ़ते जा रहे हैं और आजकल 25-30 साल के युवा भी हार्ट अटैक के शिकार होने लगे हैं। दुनिया में हर साल 2 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान कार्डियोवस्कुलर बीमारियों के कारण जाती है, इनमें भी सबसे ज्यादा मौत हार्ट अटैक की वजह से होती है। इसके लक्षणों में बढ़ा हुआ रक्तचाप, उच्च ब्लड शूगर लेवल, उच्च रक्तचाप और मोटापा शामिल है। शराब और तंबाकू का सेवन, अनियमित नींद, अस्वास्थ्यकर भोजन और अनियमित जीवनशैली की वजह से ऐसी बीमारी होती हैं।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि बीमारियां चाहे शरीर से संबंधित हों या मानसिक हों उसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। उन्होने कहा कि योग, ध्यान और प्रकृतिमय जीवन को अपनाकर स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। ’’करो योग, रहो निरोग’’, योग करो, रोज करो, मौज करो। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि योगा फाॅर हेल्थ, योगा फार ऑल, योग रामबाण है, योग संजीवनी है। योग से तन स्वस्थ, मन मस्त तथा जीवन स्थिर रहता है। योग रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है। योग, पाॅवर बूस्टर का काम करता है तथा योग और ध्यान इम्यूनिटी बूस्टर का काम करता है। योग, तन की थकान और मन के तनाव को भी दूर करता है जिससे दिल संबन्धित बीमारियों से बचा जा सकता है। कोरोना काल में तो योग, ध्यान, प्राणायाम और आयुर्वेदिक नुस्खे बहुत ही कारगर है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिये हमारी जीवन शैली सात्विक और आध्यात्मिक होना जरूरी है। साथ ही स्वस्थ रहने के लिये प्रतिदिन योग, प्राणायाम, ध्यान का अभ्यास करना जरूरी है। आईये आज विश्व हृदय दिवस के पर संकल्प लें कि योग, ध्यान और प्राकृतिक जीवन शैली अपनाकर शरीर को स्वस्थ रखेंगे।
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प्रेस नोट अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तराखंड की लोकभाषा व लोकयात्रा के विषय मे हुए परिचर्चा आज अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तराखंड के तत्वावधान में लोकभाषा लोकयात्रा पर एक संगोष्ठी दिनांक 29 सितम्बर , मंगलवार को सायं काल 5 बजे गूगल मीट एप्पलीकेशन पर आहूत की गई! ऑनलाइन संगोष्ठी में मुख्य अतिथि डॉ अतुल शर्मा जनकवि, विशिष्ट अतिथि श्रीमती अरुणा वशिष्ट एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष सुनील पाठक जी व प्रांतीय महामंत्री शिव प्रसाद बहुगुणा जी (कार्यक्रम संयोजक) की अध्यक्षता में ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया! ऑनलाइन संगोष्ठी का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना श्रीमती प्राची पाठक जी द्वारा करके किया गया! कार्यक्रम में वक्ता डॉ राजे नेगी(नेत्र चिकित्सक) ने बताया कि इस विचार गोष्ठी होती रहनी चाहिए जिससे कि आज के युवाओं को उत्तराखण्ड के लोक भाषा ,लोकयात्रा व लोक पर्व,व लोक देवता के बारे में रुचि उत्पन्न की जा सके व जिसके लिये वह भी अपने ऋषिकेश में पहला उड़ान लोकभाषा ,लोकसंस्कृति पर आधारित निशुल्क स्कूल ऋषिकेश में चला रहे हैं, लोकभाषा संरक्षक के रूप में भी करने का महत्वपूर्ण प्रयास कर रहे है, एवं उन्होंने कहा कि बैठक में वक्ता के रूप में बोलने का अवसर प्राप्त होना यह मेरे लिये गौरव का विषय है ! कार्यक्रम में वक्ता नरेन्द्र खुराना(अखिल सहित्य परिषद प्रदेश मीडिया प्रभारी) ने कहा कि भाषा विज्ञान ना केवल भाषाओं का अध्ययन में ही उपयोगी है, बल्कि साहित्य के अध्ययन में भी अत्यंत उपयोगी होता है। क्योंकि साहित्य में प्रयुक्त विभिन्न भाषाओं का निर्माण एवं संरक्षण का संपूर्ण ज्ञान भाषा विज्ञान के द्वारा ही प्राप्त होता है। .. तथा भाषा विज्ञान से ही यह ज्ञात होता है।ओर लोक यात्राओ में उत्तराखंड के चार धाम,पंच केदार ,पंच प्रयाग की भी अपनी हमारे देश मे महत्वपूर्ण भूमिका है! कार्यक्रम में वक्ता डॉ धीरेन्द्र रांगड़ एवं नरेन्द्र रयाल जनकवि ने भी संयुक्त रूप से अपने लोकभाषा व लोकयात्राओ पर अपने विचार व्यक्त किये! अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रदेश अध्य्क्ष सुनील पाठक ने सभी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि जहां इस समय युवा पीढ़ी अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को सीखनेे में अपनी रुचि दिखा रही है, जिससे कि स्थानीय भाषा अपने ही क्षेत्र में पिछड़ रही है। ऐसे मेंं अभी भी कुछ लोग उत्तराखंड की लोक भाषाओं व यात्राओ के संरक्षण एवं प्रचार प्रसार कर रहे हैं।जिसमे अखिल भारतीय साहित्य परिषद कार्यकारिणी व समाजसेवी युवा एक नए आयाम की ओर ले जा रहे है ,वह सभी बधाई के पात्र है ! कार्यक्रम में शिव प्रसाद बहुगुणा(कार्यक्रम संयोजक) ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए सभी हिंदी साहित्यकारों व युवा पीढ़ी का आभार प्रकट किया व सभी को शुभकामनाएं दी! विचार गोष्टी में कार्यक्रम का संचालन कर रही किरण पन्त वर्तिका के संचालन में शंभू प्रसाद भट्ट स्नेहिल, डॉ दिवा भट्ट, कौस्तुभ आनंद चंदोला, अंजली शर्मा, त्रिलोक सिंह परमार, विवेक डोभाल व हिंदी साहित्यकार आदि उपस्थित रहे!

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