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जवानों का मनोबल बढ़ाने अचानक लेह पहुंचे पीएम मोदी

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नईदिल्ली । भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर जारी गतिरोध के दौरान आज अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेह लद्दाख पहुंचे। उन्होंने लेह के नीमू फॉरवर्ड पोस्ट पर अधिकारियों से बात की और सुरक्षा हालात का जायजा लिया। अचानक लेह पहुंच कर सरप्राइज विजिट करने वाले मोदी ने चीन और पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया को संदेश दिया है। पीएम के साथ इस दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत भी मौजूद रहे। उन्होंने इस यात्रा के दौरान सैनिकों से बातचीत भी की। पीएम मोदी ने सीमा पर अग्रिम मोर्चे नीमू का जायजा लिया। वह अचानक ही आज सुबह लेह पहुंच गए थे।
यहां पहुंचकर पीएम मोदी ने थलसेना, वायुसेना और आईटीबीपी के जवानों से मुलाकात की। नीमू करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है जो सबसे कठिन परिस्थिति वाली जगह मानी जाती है। ये जगह जांस्कर रेंज से घिरी हुई है। अचानक पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी दी। सीडीएस जनरल रावत आज पीएलए के खिलाफ अपनी तीनों सेनाओं की तैयारियों का जायजा लेने के लिए पूर्वी लद्दाख में हैं। साथ ही सीमा पर तनाव कम करने की प्रक्रियाओं के बारे में भी वह जानकारी लेंगे। जनरल रावत सेना प्रमुख के तौर पर चीनी सेना के समक्ष खड़े रहे चुके हैं। वर्ष 2017 में दोकलाम में 73 दिनों तक भारतीय सेना चीनी सेना के समक्ष डटी रही थी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का लद्दाख दौरा गुरुवार को स्थगित हो गया था। वे शुक्रवार को सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के साथ लद्दाख जाने वाले थे। लद्दाख में रक्षा मंत्री को चीनी सेना के साथ सीमा पर गतिरोध के मद्देनजर भारत की सैन्य तैयारियों का जायजा लेना था। अब उनके कार्यक्रम को दोबारा तैयार किया जा रहा है। अगर रक्षा मंत्री शुक्रवार को लद्दाख जाते तो भारत-चीन की सेनाओं के बीच गतिरोध के दौरान उनका पहला लद्दाख दौरा होता। उनके साथ थलसेनाध्यक्ष नरवणे भी जाने वाले थे। बता दें कि नरवणे कुछ दिन पहले ही लद्दाख दौरे से लौटे हैं। माना जा रहा था कि राजनाथ सिंह के दौरे का मकसद सैनिकों का मनोबल बढ़ाना था।
इससे पहले सेना प्रमुख ने 23 और 24 जून को लद्दाख का दौरा किया था। जनरल नरवणे ने जवानों को सम्मानित करते हुए उनका हौसला बढ़ाया था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली आकर रक्षा मंत्री को हालात की जानकारी दी थी। बता दें कि वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच मंगलवार को चुशुल सेक्टर में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी। पिछले एक महीने से सीमा पर भारत और चीन के बीच तनाव को कम करने पर बातचीत जारी है। 15 और 16 जून को गलवां घाटी में चीनी सेना ने घुसपैठ करने की कोशिश की थी, जिन्हें भारतीय सेना ने रोका था। इस हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे।

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