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मायावती जी का गुलाबी किला समाजवादियों का मुरझाया दिल खिला

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chief editor nwn

B. of Journalism
M.A, English & Hindi
सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला द्वारा रचित- 
Virendra Dev Gaur Chief Editor (NWN)
Mob.9528727656

लोकतंत्र के लुभावने लुटेरे

क्या आज के भारत में
नेता इसलिए बनना चाहता है
एम एल ए, एम पी और मंत्री
ताकि ईमानदार से ईमानदार
और कर्मठ से कर्मठ
आई ए एस और आई पी एस अफसर भी
फाइलें लेकर खड़े रहें उसके आगे-पीछे
मेमने बनकर, लोकतंत्र की बदौलत।
बेईमान और अय्याश
अफसरों से साँठ-गाँठ कर
करें करोंड़ों-अरबों की हेरा-फेरी
और पढ़े-लिखे सभ्य ईमानदार
अफसरों को करें पग-पग पर अपमानित
करें उनके सिद्धान्तों पर हमला
ताकि वे पड़ जाएं अलग-थलग।
राजनीति में अफसरशाही
या अफसरशाही में राजनीति
उत्तर सीधा-सादा है
भ्रष्ट राजनीति और भ्रष्ट अफसरशाही
दोनों की चोली-दामन वाली यारी।
पर छाती में
उठता है दर्द
बढ़ जाती है असहनीय बेचैनी
जब खयाल आता है
उस ज़मीनी हक़ीकत का
जिसमें एक ओर अपमान का घूँट पीकर
तिलमिलाए दिखाई पड़ते हैं अच्छे अफसर
दूसरी ओर दिखाई पड़ती है
लुटी-पिटी ठगी गई जनता
पिसती हुई भ्रष्टाचार की निष्ठुर चक्की में।
राजनीति का
पूरा का पूरा ढर्रा
भ्रष्टाचार की बुनियाद पर है खड़ा
ऐसे में
अफसरों और कर्मचारियों को
ईमान की दुहाई देना
और लोकतंत्र की बढ़ाई करना
बेसुरा-बेकार-बेअर्थ लगता है बड़ा।
             (2)
राम कृष्ण प्रदेश (उ0प्र0) के
नंगो-भूखो, दबे-कुचलो, मैले कुचैलो और गरीबो
देखो मायावती जी के गुलाबी महल को
यह मायावती जी का है गुलाबी-किला
जैसा दिल्ली में शाहजहाँ ने बनवाया था लाल-किला।
क्या आप महारानी-मायावती के
चेले-चपाटों को देंगे वोट
अपनी झुग्गी-झोंपड़ियों से निकलकर
जो आपने खड़ी की हैंं तिनका-तिनका जोड़कर
या कि आप उनको देंगे वोट
जिनके विधायकों ने 2 जून 1995 के दिन
लखनऊ गेस्ट हाउस कांड में गुंडई मचाकर
देवी मायावती जी के साथ वो करने की
नाकामयाब नीच हरकत की थी
जिसे हम यहाँ लिखते वक्त
काँप उठते हैं नीचे से ऊपर तक।
जी हाँ
देवी मायावती जी
तब के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के
सपाई विधायक गुंडों के हाथों
इज्जत गँवाने वाली थीं
पुलिस अफसर तमाशबीन बने
सिगरेट के लम्बे-लम्बे कस खींच रहे थे
मनुवादी बीजेपी विधायक ब्रम्हदत्त द्विवेदी ने
जान हथेली पर लेकर
श्री कृष्ण बनकर बचाया था द्रौपदी माई को
फिर लखनऊ के तत्कालीन डीएम ने किया था
बहुत बहादुरी से निर्णायक काम।
             (3)
खैर! यह तो था
मुलायम कुटुम्ब के सपनों का सुन्दर-समाजवाद
आज चौकीदार को देने के लिए पटकनी
करने के लिये मनुवादी को चारों खाने चित्त
1995 गेस्ट हाउस कांड की पीड़ित नायिका
और सभी माननीय खलनायक
एक छाता लिए तनकर हैं खड़े
मोदी को हराने की जिद्द पर हैं अड़े।
             (4)
इन्ही देवी मायावती जी ने
गेस्ट हाउस कांड से करीब आठ साल पहले
तुनक मिजाजी में आकर डकैत ‘‘घनश्याम केवट’’
मामले की लेकर आड़
लोकल इंटेलीजेंस फेलियर के पाप का घड़ा
तत्कालीन डी जी पी विक्रम सिंह पर था फोड़ा
बेइज्जद महसूस करते हुए सिंह साहब ने
अपना सबसे बड़ा पद था छोड़ा
इस तरह एक कड़क, ईमानदार और मेहनती अफसर ने
दुखी होकर सक्रिय पुलिस व्यवस्था से मुँह था मोड़ा
इस अपमान का दिल में उनके पनप रहा होगा फोड़ा।
जब तक
कु-व्यवस्था में नहीं होगा सुधार
तब तक ईमानदारी के फरिश्ते
गेहूँ के घुन बनकर पिसते रहेंगे
अकारण अपमान सहते रहेंगे
और लोकतंत्र ऐसे ही फलता-फूलता रहेगा।

जय भारत     जय जवान       जय किसान

(though we avoided holi this time for the sake of pulwama but

we are duly thankful to those officers who wished us happy holi)

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