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सुशांत सिंह राजपूत का परोक्ष हत्याकांड फिल्म इंडस्ट्री के लिए शर्मनाक

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कंगना की दिलेरी रानी लक्ष्मीबाई से कम नहीं

देवी कंगना तुम हमारे लिए
फिल्म इंडस्ट्री की रानी लल्मीबाई से बढ़कर हो
तुम भयानक तनावों के बीच भी लड़ती, तनकर हो
झुकने और रुकने के बजाय तुम बीड़ा उठा लेती हो
शोषण के खिलाफ तुम हिम्मत की तलवार लहरा देती हो
नहीं पता तुमको किसने महारानी लक्ष्मीबाई का दिया किरदार
किन्तु तुम तो असल में भी हो तमाम देवियों में सरदार
तुमने सुशांत के लिए उठाई सबसे पहले आवाज़ दमदार
सचमुच तुम्हारा दिल तुम्हारी काया की तरह सुन्दर है यही है पूरा का पूरा सार
फिल्म इंडस्ट्री का होता है बहुत अधिक स्वार्थी संसार
इसीलिए ‘‘दुष्ट-मंडली’’ वहाँ की खा रही थी सुशांत के टैलेन्ट से खार
हो गया बेचारा रुखसत होकर तुम्हारी दुनिया से बेज़ार।
आपके बाद अगर किसी का लगा हमको अच्छा विचार
धर्मेन्द्र जी ने भी जताया दुख दिल की गहराई से अपार
कहा फिल्म इंडस्ट्री को क्रूर दिया सच बोलकर अच्छा आदमी होने का प्रमाण
वे अच्छी तरह जानते हैं फिल्म इंडस्ट्री की आत्मा और प्राण
वहाँ तौला जाता है आदमी को सोने के सिक्कों में
गुण और स्वभाव को तो गिनते हैं वे वाहियात किस्सों में
फिल्म इंडस्ट्री तो भावनाओं के व्यापार की मंडी है
वहाँ दबाकर मारी जाती इन काइयाँ व्यापारियों द्वारा डंडी है।
शेखर कपूर जी का भी हमको रुख खूब भाया
उन्हें भी मासूम प्रशांत की मौत पर शायद रोना आया
फिल्म इंडस्ट्री की ‘‘दुष्ट मंडली’’ को कैसे दोषी ठहराया जाए
इस दुष्ट मंडली के इशारों पर ही घूमता है वहाँ का चक्का हाए
फिल्मी-माफियाओं की अगर गहरी पड़ताल की जाए
तो बड़े से बड़ा सुराग हाथ में आए
पूरी दुनिया दाँतों तले अँगुलियाँ दबाए खड़ी की खड़ी रह जाए
पर ऐसा करेगा कौन माई का लाल कोई हमें समझाए
बिल्लों के गले में कौन बाँधेगा घंटी कोई हमें बताए
इसलिए सुशांत की परोक्ष हत्या से पर्दा उठता नजर न आए।
कंगना रनौत तूने शेरनी माँ का पीया है दूध
क्या टिक पाएगा तेरे सामने कोई अच्छा-खासा पूत
हमने खो दिया एक माँ भारती का होनहार सपूत
जो अपने सीधेपन के कारण वर्तमान से बन गया भूत
फिल्म इंडस्ट्री के दुष्टों के कारण एक मेहनती नौजवान चला गया लेकर सबूत
अरे! कंगना जैसे हिम्मत वालों से लेते प्रेरणा प्यारे सुशांत राजपूत।
सुना है तुम किसी प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में
प्रथम दस में रहे थे अव्वल
अगर यह सच है गुजर गए मित्र तो
तुम कुछ साल बाद सिविल सर्विस की परीक्षा में भी
कर सकते थे इसी तरह का धमाल
तुम तो फिल्म इंडस्ट्री में भी कर रहे थे कमाल।
तुम एक समर्पित विद्यार्थी थे
इसीलिए तुम चालूपंथ से थे कोसों दूर
तुम्हें करवट में लेने के लिए
फिल्म इंडस्ट्री के घाघ घेर रहे थे तुमको
वे शायद निकम्मा-नालायक कह रहे थे तुमको
ताकि तुम उनके कदमों में बिछ जाते
वे जैसा चाहते तुम्हें नचाते
यस सर यस सर वाले दो पैरों के कुकुर तुम बन जाते
ऐसा कर देते तो प्यारे दोस्त तुम अपने स्तर से गिर जाते
यही सोच-सोचकर तुमने खुद को समझ लिया अकेला
केाई कपूर या कोई खान नहीं आया तुम्हे बनाने चेला
तुम्हे लगा तुम्हे त्याग देगा फिल्म इंडस्ट्री का मेला
दोस्त ‘‘एकला चलो रे’’ का मंत्र तुम अपनाते
अपनी अपार ऊर्जा से तुम संघर्ष करते जाते
फिल्म इंडस्ट्री के ‘मोगैम्बो’’ एक-एक कर तुमको सर नवाते
तुम मेधावी विद्यार्थी थे तुम सुपर-स्टार तक बन जाते
अपने जैसों को भविष्य में संघर्ष और इच्छाशक्ति की राह दिखाते।
          -सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला, स्वतंत्र पत्रकार, देहरादून।

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