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बदरीनाथ धाम में पूजा अर्चना के साथ खडग पुस्तक हुई बंद

बदरीनाथ (संवाददाता)। बदरीनाथ धाम में चल रही पंच पूजाओं के तीसरे दिन पूजा-अर्चना के बाद खडग पुस्तक बंद कर दी गई। इसके साथ ही धाम में अब 20 नवंबर को कपाट बंद होने तक बिना वेद ऋचाओं के ही भगवान बदरी नारायण की पूजा होगी। वहीं, सोमवार को रावल भगवान की सखी का वेश धारण कर मां लक्ष्मी को भगवान नारायण के साथ गर्भगृह में आने का न्यौता देंगे।
सुबह बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी के सानिध्य में धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल व वेदपाठियों ने खडग पुस्तक की पूजा-अर्चना की। इसके बाद पुस्तक को श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के तोषखाने में रख दिया गया।
यह ऐसी अहम पुस्तक है, जिसमें मौजूद वेद ऋचाओं के आधार पर ही भगवान बदरी विशाल की नित्य पूजाएं संपन्न कराई जाती हैं। अब अगले साल कपाट खुलने के मौके पर खडक पुस्तक को तोषखाने से बाहर निकाला जाएगा। इसके बाद वेद ऋचाओं के साथ ही भगवान बदरी विशाल की पूजा-अर्चना होगी।
इससे पहले बदरीनाथ धाम में चल रही पंच पूजाओं के क्रम में दूसरे दिन भगवान आदि केदारेश्वर मंदिर के कपाट बंद किए गए। इसके अलावा आदि शंकराचार्य मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए गए हैं। कपाट बंद करने से पहले भगवान को अन्नकूट का भोग लगाया गया।आपको बता दें कि श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 20 नवंबर दोपहर बाद 3 बजकर 21 मिनट पर बंद होने हैं।

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