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घाटी से उठी पुकार ‘‘अटल आयुष्मान योजना’’ अबकी बार (कविता)

atal yojana

gaur

B. of Journalism
M.A, English & Hindi
सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला द्वारा रचित- 
Virendra Dev Gaur Chief Editor (NWN)

अटल आयुष्मान योजना

पच्चीस दिसम्बर की शुभ तिथि पधारे
कण-कण जीवन का मॉ भारती पर वारे
भारत की पावन माटी से निकले अटल जी प्यारे
भारत को स्वाभिमानी-सक्षम राष्ट्र बनाने के लगाए नारे
यह अगँड़ाई दिल में लेकर तुम धरती पर आए
जवानी खपा दी यही सोच-सोच हे मानव न्यारे
पर होंठो से पल-पल मुस्काए अटल जी कभी न हारे
कठिन पलों के घेरे रहते थे
जब-जब तुमको काले साए
मुखमंडल का तेज प्रबल प्रतापी
मजाल है जो तुम्हारा तनिक भी मुरझाने पाए।
तेरे जैसा अजातशत्रु
भला कभी मरता है
तेरे जैसा समदर्शी
बिरला ही जन्म लेता है
तेरे जैसा धर्मवीर
और तेरे जैसा कर्मवीर
कहाँ कभी सोता है
तू तो रे माली अजर-अमर
दिलों में समता के बीज बोता है।
नाम पाया तूने पावन अटल
धीरज धरम संयम जैसे खिलता कमल
आयुष्मान योजना का चिर-आयु फल
तेरे आशीर्वाद का ही मधुर प्रतिफल
तेरी अटल मुस्कान होगी सफल
तेरी उम्मीदों पर खरे उतरेंगे पल-पल
निखारेंगे मिलकर हम भारत का कल।
-जय भारत जय अटल

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