Breaking News

जौनसार-बावर में भी खेतीबाड़ी का पैटर्न बदलने लगा

विकासनगर (संवाददाता)। समय के साथ पर्वतीय क्षेत्र जौनसार-बावर में भी खेतीबाड़ी का पैटर्न बदलने लगा है। किसान परंपरागत खेती में हो रहे घाटे से बचने को अब नकदी फसलों पर जोर दे रहे हैं। पिछले कुछ समय से घरेलू टमाटर के उत्पादन में आई गिरावट से परेशान देवघार क्षेत्र के किसानों ने पहली बार प्रयोग के तौर पर इंडो अमेरिकन टमाटर की खेती की शुरूआत की। जिसके बेहतर नतीजे निकले। बीमारी लगने का खतरा कम होने के कारण भी किसानों को फायदा पहुंचा, साथ ही इंडो अमेरिकन प्रजाति से उत्पादन भी अच्छा मिला।
जौनसार-बावर के ग्रामीण इलाकों में अधिकांश लोगों की आजीविका खेती-बाड़ी व बागवानी पर निर्भर है। करीब दो लाख की आबादी वाले जनजातीय क्षेत्र में साठ फीसद लोग कृषि-बागवानी से परिवार का गुजारा चलाते हैं। यहां शुरुआती दौर में परंपरागत खेती का काफी चलन था। लेकिन मौसम की बेरुखी से परपंरागत खेती में लगातार हो रहे घाटे से बचने को ग्रामीण किसान नकदी फसलें उगाने लगे।
जिसमें टमाटर, फूल गोभी, पत्ता गोभी, खीरा, लोकी, गागली, मिर्च, आलू, कद्दू, भिंडी, ककड़ी, शिमला मिर्च और अन्य साग-सब्जियों की पैदावार अच्छी होने से किसानों के चेहरे खिल उठे। परपंरागत खेती को छोड़ नकदी फसलों के उत्पादन से ग्रामीण किसानों को पहले के मुकाबले अच्छा मुनाफा मिला। क्षेत्र में घरेलू टमाटर हेमसोना व अभिनव की खेती बड़े स्तर पर होने से इसे बीमारी ने जकड़ लिया।
घरेलू टमाटर में लगे रोग का असर इसके उत्पादन पर पड़ा। जिससे पैदावार में आई तेजी से गिरावट के चलते किसानों को खेतीबाड़ी में काफी नुकसान उठाना पड़ा। घाटे से उभरने को अटाल, सैंज-तराणू व अणू समेत आसपास के ग्रामीण किसानों ने पहली बार प्रयोग के तौर पर इंडो अमेरिकन टमाटर खेती की शुरुआत की। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अटाल पंचायत के पूर्व प्रधान एवं प्रगतिशील किसान प्रेमचंद शर्मा, सैंज-तराणू के श्रीचंद शर्मा, अणू के किसान व पूर्व क्षेत्रपंचायत सदस्य राजाराम शर्मा, देवानंद शर्मा आदि ने कहा देवघार क्षेत्र में करीब दो सौ किसान इंडो अमेरिकन टमाटर की खेती कर रहे हैं।
जिसकी पैदावार घरेलू टमाटर से दो से तीन गुना ज्यादा है। इंडो अमेरिकन टमाटर में बीमारी लगने का खतरा कम है। प्रयोग सफल रहने से इस बार टमाटर उत्पादन पहले से कई गुना ज्यादा रहा। लेकिन बाजार व मंडी में टमाटर के सही रेट नहीं मिलने से किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा। घरेलू टमाटर के मुकाबले इंडो अमेरिकन टमाटर की बंपर पैदावर होने से किसानों के चेहरे खिल उठे पर बाजार में भाव गिरने से लोगों को मायूसी हाथ लगी। मार्केट में शुरुआती दौर में टमाटर की प्रति कैरेट 25 से 27 रुपये प्रति किलो का भाव मंडी में रहा, बीच में रेट गिरे तो नुकसान हुआ, अब रेट सही होने से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं

Check Also

प्रदेश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप मॉडिफाई किया जाए : मुख्य सचिव

देहरादून ।  मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में उच्च शिक्षा विभाग की …

One comment

  1. 978533 566455Hey, you used to write outstanding, but the last few posts have been kinda boringK I miss your super writings. Past few posts are just a little out of track! come on! 77297

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *