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लगातार जारी है हैली टिकटों की कालाबाजारी

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देहरादून (संवाददाता)। उत्तराखंड में इन दिनों चारधाम यात्रा अपने चरम पर है। देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री यहां पहुंच रहे हैं। कई श्रद्धालु पैदल मार्ग अपना रहे हैं तो कई लोग हेली सर्विस ले रहे हैं। मुश्किल यहीं से शुरू हो रही है। दरअसल, हेली सेवा के नाम पर यात्रियों से लाखों में मनमाफिक किराया वसूले जा रहे हैं। चारधाम यात्रा के दौरान हर बार हेली सर्विस के टिकटों की कालाबाजारी का मामला सुर्खियों में रहता आया है। इस साल भी हाल कुछ ऐसे ही हैं लेकिन अबकी बार यात्रा शुरू होने से पहले ही हेली सर्विस सुर्खियों में आ गई थी। दरअसल, इस दफा राज्य सरकार की ओर से काफी लेटलतीफी की गई। पहले तो हेली सर्विस कब शुरू होगी इस पर ही संशय बना रहा, उसके बाद किराया सूची जारी करने में देरी की गई। इससे हुआ ये कि दलालों की खूब चांदी हो गई। सरकार द्वारा हेली किराया सूची यात्रा शुरू होने के करीब 18 दिन बाद निर्धारित की गयी। इस दौरान हेली सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियों के दलालों को यात्रियों से तीन-चार गुना ज्यादा किराया वसूलने को पूरा मौका मिल गया। इसका उदाहरण तब देखने को मिला जब बीती 15 मई को हेली कंपनी यूटीएयर के फाटा हेलीपैड पर टूर एंड ट्रेवल्स के मालिक विजय सिंह राणा व उसका एजेंट प्रतापा वेंकटा सुब्रह्मण्यम वारा प्रसाद, विशाखापट्टनम से यादव ट्रेवल्स के एजेंट पीएस राजू के साथ 33 यात्रियों को केदारनाथ दर्शन के लिए लाया था। दल द्वारा एजेंट को 2 लाख 30 हजार रुपये दिए गए थे, लेकिन एजेंट 80 हजार रुपये और देने की मांग करने लगा। मामला संज्ञान में आते ही पुलिस अधीक्षक प्रहृलाद नारायण मीणा के निर्देश पर सीओ अभय कुमार और गुप्तकाशी व फाटा चौकी प्रभारी ने दोनों आरोपियों के विरुद्घ चौकी फाटा में मुकदमा दर्ज कर एक को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी प्रतापा वैंकटा सुब्रह्मण्यम वारा प्रसाद के कब्जे से 50 हजार रुपये भी बरामद किए गए हैं। उसका साथी विजय सिंह राणा अभी हत्थे नहीं चढ़ा है। दोनों आरोपी हैदराबाद के हैं, जो यात्रियों को हैदराबाद से यहां लेकर आये थे। दरअसल, हो ये रहा है कि बाहरी राज्यों से दलाल उत्तराखंड आ रहे हैं और यात्रियों से पहले ही सेटिंग कर रहे हैं। ऐसे व्यक्तियों पर काबू रख पाने की नाकाम कोशिश से इन दलालों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। ये दलाल देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार से लेकर फाटा, सिरसी और अन्य हेलीपैड के आसपास पूरी तरह से सक्रिय हैं। इन दलालों का मेन फोकस उन स्थानों पर होता है जहां यात्रियों की आवाजाही या संख्या अधिक रहती है। वहां पर स्थानीय चाय वाले या दूसरे दुकानदार भी हेली सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियों के अघोषित दलाल के रूप में कार्य कर रहे हैं। इन दलालों की निगाहें ज्यादातर उन ग्राहकों पर रहती है जिनके पास समय के अभाव में टिकट पाने की जल्दी रहती है।

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