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मंदिरों का शहर किसे कहा जाता है ? अगर आप जानते हैं तो कमैंट्स करें नहीं तो क्लीक करके देंखे

बनारस को मंदिरों का शहर कहा जाता है. यहां कई ऐसे मंदिर हैं, जिनके बारे में यह मान्यता है कि सच्चे मन से अगर उन मंदिरों का दर्शन किया जाए, तो मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. आइए जानते हैं उन मंदिरों के बारे में…

बनारस या वाराणसी में एक से ब़ढकर एक मंदिर हैं, तभी तो इसे मंदिरों का शहर कहा जाता है. यहां देश के अन्य भागों से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्घालु दर्शन के लिए आते रहते हैं. हिंदुओं के इष्ट शिव हों या हनुमान या फिर देवी दुर्गा, सीताराम, काल भैरव या अन्नपूर्णा. यहां के मंदिरों की भव्यता का डंका पूरे विश्‍व में बजता है. कहा जाता है कि सारे हिंदू देवताओं का वास काशी में होता है. हम आपको पहले दर्शन करवाते हैं काल भैरव मंदिर का.

काल भैरव – यह मंदिर अन्य मंदिरों से अलग है, जो वाराणसी के विशेश्वर गंज में स्थित है. यहां अन्य मंदिरों की तरह चमक-दमक देखने को नहीं मिलती, लेकिन यह भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है. यहां भगवान का चेहरा काला दिखाया गया है. काल भैरव के मंदिर में लोग कई तरह की व्याधियों से छुटकारा पाने के लिए जाते हैं. काल भैरव का वर्णन शास्त्रों में कई जगह मिलता है. भैरव शिव के गण माने जाते हैं. भैरव की सवारी कुत्ता है. उन्हें चमेली का फूल प्रिय है, इसलिए उनकी पूजा में इसका विशेष महत्व है. भैरव रात्रि के देवता माने जाते हैं और उनकी आराधना का खास समय भी मध्य रात्रि में 12 से 3 बजे का माना जाता है. भैरव के नाम के जप मात्र से ही मनुष्य को कई रोगों से मुक्ति मिलती है. वह संतान को लंबी उम्र प्रदान करते हैं. अगर आप भूत-प्रेत बाधा, तांत्रिक क्रियाओं से परेशान हैं, तो शनिवार या मंगलवार को कभी भी अपने घर में भैरव पाठ का वाचन करा कर समस्त कष्टों और परेशानियों से मुक्त हो सकते हैं. जन्म कुंडली में अगर आप मंगल ग्रह के दोषों से परेशान हैं, तो भैरव की पूजा करके पत्रिका के दोषों का निवारण आसानी से कर सकते हैं. राहु-केतु के उपायों के लिए भी उनका पूजन करना अच्छा माना जाता है. भैरव की पूजा में काली उड़द और उड़द से बने इमरती, दही बड़े, दूध और मेवा का भोग लगाना लाभकारी है. इससे भैरव प्रसन्न होते हैं. भैरव कवच से असामयिक मृत्यु से बचा जा सकता है.

विश्‍वनाथ मंदिर – काशी विश्‍वनाथ जी का मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यह मंदिर कई वर्षों पुराना है. माना जाता है कि पवित्र गंगा में स्नान कर काशी विश्‍वनाथ जी का एक बार दर्शन मात्र से सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं और मोक्ष प्राप्त होती है. इस मंदिर में दर्शन करने के लिए करोड़ो लोग हर वर्ष आते हैं. नया विश्‍वनाथ मंदिर भी भव्य है, जो बनारस हिन्दू विश्‍वविद्यालय के परिसर में बना हुआ है.

अन्नपूर्णा मंदिर – काशी विश्‍वनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर अन्नपूर्णा माता का मंदिर है. उन्हें तीनों लोकों की माता माना जाता है. कहा जाता है कि उन्होंने स्वयं भगवान शंकर को खाना खिलाया था.यह मंदिर भी दर्शनीय है.

दुर्गा मंदिर – दुर्गा माता मंदिर 18 वीं शताब्दी में बना था. इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि दुर्गा जी की प्रतिमा मानव निर्मित नहीं है, बल्कि यह प्रतिमा मंदिर में अपने आप ही प्रकट हुई थी. दुर्गा मंदिर के सामने ही एक बड़ा तालाब है, जिसे दुर्गा कुंड के नाम से जाना जाता है.

संकट मोचन – संकट मोचन मंदिर रामभक्त हनुमान जी को समर्पित है और काफी लोकप्रिय है. यहां मंगलवार और शनिवार को सुबह से लेकर शाम तक काफी संख्या में लोग आते हैं. शाम के समय यहां भव्य आरती होती है, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. यहां की एक खास विशेषता है बंदरों की विशाल संख्या, जो भारत के किसी भी मंदिर में देखने को नहीं मिलती. कहा जाता है कि चूंकि हनुमान जी बंदर के ही रूप थे, इसलिए यहां के मंदिरों में बंदरों की संख्या बहुत अधिक पाई जाती है. मान्यता है कि यहां मांगी गईं सारी मन्नतें पुरी हो जाती हैं.

साक्षी गणेश – पंचकोशी यात्रा को पूरा कर तीर्थयात्री साक्षी गणेश के दर्शन के लिए जाते हैं. मान्यता है कि इस मंदिर के दर्शन के बाद ही पंचकोशी यात्रा पूर्ण होती है. इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि सच्चे मन से मंदिर का दर्शन करने पर सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.

विशालाक्षी मंदिर – काशी विश्‍वनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर विशालाक्षी मंदिर स्थित है, जो इक्यावन शक्ति पीठों में से एक है. कहा जाता है माता शती की यहां आंख गिरी थी. यह मंदिर भी बहुत सुंदर है. -साभार

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