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राजनीति के मौलानाओं ने तीन तलाक बिल को किया तार-तार

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मुस्लिम खवातीनों को सदियों की जिल्लत से तसल्ली दिलाने की राह में कांग्रेस ने एक बार फिर रोड़ा लगा दिया। मौलाना राहुल गाँधी ने अपने स्वर्गीय पिता प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के नक्षेकदम पर चलते हुए कट्टरपंथी मुस्लिम मर्दों का दिल जीतना उचित समझा और बहानेेबाजी का आसरा लेकर तीन तलाक के बिल को राज्य-सभा में उल्टा लटका दिया। राजीव गाँधी ने भी एक बार ऐसा ही किया था। अरे तब तो मोदी नहीं थे। कांग्रेस ने सदैव मुस्लिम कट्टरपंथ को बढ़ावा देकर वोटगर्दी की है। कांग्रेस की मुस्लिम खवातीनों से कभी कोई हमदर्दी नहीं रही। आजाद भारत के इतिहास में पहली बार किसी राजनीतिक दल ने यह दिखाया कि औरतों से इन्साफ करने के लिये उसके पास कलेजा है। षाह बानों से शायरा बानों और इशरत जहाँ तक की जलालतों और कुर्बानियों को इस कदर शर्मसार करने में कांग्रेस का साथ दिया वामपंथियों और संस्कार हीन समाजवादियों और बसपाइयों ने। भारत के लोगों को समझ में आ जाना चाहिए कि बेपेंदी के लोटे वामपंथी, संस्कारहीन समाजवादी, दिशाहीन बसपाई और अन्य राजनीतिक दल कांग्रेस की तरह जातिवादी ज़हर की खेती कर सत्ता सुख भोगते रहे हैं। भारत के लोगों को समझ लेना होगा कि तीन-तलाक के मुद्दे पर भाजपा को छोड़कर बाकी सभी दलों का जो रूख खुलकर सामने आया है वही इन राजनीति के दलदलों का असली चरित्र है। कांग्रेेस के पास एक मौका था कि वह राजीव गाँधी के समय हुए कांग्रेसी गुनाह के धब्बे धो डालती और मुस्लिम खवातीनों के सिर पर लटकी तीन-तलाक की तलवार को हमेशा-हमेशा के लिये हटा देती। पर मौलाना राहुल गाँधी को इन्सानियत से कोई वास्ता नहीं। मौलाना राहुल जैसे नौसिखिये कांग्रेसी नेता से भारत माता के पक्ष में किसी फैसले की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह आदमी तो एक मशीन है जिसके लिये भारत उछल-कूद का अड्डा मात्र है। मौलाना नेहरू से लेकर मौलाना राहुल ने यदि कोई काम कर्तव्यपरायण होकर किया है तो वह है मुस्लिम कट्टरपंथ को मजबूत करना। देश को समझ लेना चाहिए कि जिस तरह मौलाना राहुल का दिल इटली में है उसी तरह सभी वामपंथियों का दिल चीन के चरणों में है। मुलायम परिवार और मायावती परिवार सत्ता के कीड़े हैं। यदि यह हकीकत नहीं समझी गई तो देश एक बार फिर जातिवाद की हिंसा में झोंक दिया जाने वाला है। तीन तलाक के बिल का अपमान इसी सच्चाई की ओर इशारा कर रहा है। भारत के जनमानस को साफ-साफ समझ लेना होगा कि मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार सही मायने में सभी धमों और मज़हबों को समान नजरिये से देखने की कोशिश कर रही है ताकि किसी धर्म या मज़हब के साथ तुष्टिकरण की बीमार नीति से बचा जा सके। पूरे देश को जाति पाति की भावना से ऊपर उठकर देश को मजबूत बनाने के लिए एकजुट होना होगा। जातिवादी और मजहबी कट्टरपंथी ताकतें इस देश को सदैव कमजोर करती आयी हैं। तीन तलाक के बिल को राज्यसभा में ला बनाकर लटका दिया जाना हमारी आंखे खोलने के लिए काफी होना चाहिए। भाजपा की इस पाक कोशिश को नापाक साबित करने वाले दलों के असली चेहरे अब रोशनी में आ चुके हैं।                                   -Virendra Dev Gaur

                                    Chief-Editor

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