Breaking News
save wildlife

हादसों से वन्यजीवों को बचाने के लिए लिया जाएगा तरंगों का सहारा

save wildlife

देहरादून (संवाददाता)। जिन तरंगों को मनुष्य अपने कानों से नहीं सुन सकता, अब वही तरंगें रेलवे ट्रैक पर होने वाले हादसों से वन्यजीवों को बचाएंगी। सिस्मिक वेव पर आधारित इस तकनीक पर देश में पहली बार उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व में काम हो रहा है। इससे मिलने वाले सिस्मिक सिग्नेचर से यह पता लग जाएगा कि रेलवे ट्रैक के पास कौन से जानवर की मौजूदगी है। इसके बाद तुंरत ही इसकी सूचना रिजर्व प्रशासन के साथ ही रेलवे अधिकारियों को दी जाएगी, ताकि वन्यजीवों को ट्रेन की चपेट में आने से बचाया जा सके। यह एडवांस एनिमल डिटेक्शन सिस्टम करीब डेढ़ माह में आकार ले लेगा। राजाजी रिजर्व में इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से कांसरो-मोतीचूर- हरिद्वार के बीच होगा, जहां वन्यजीवों के ट्रेन की चपेट में आने की घटनाएं अक्सर सुर्खियां बनती हैं। राजाजी टाइगर रिजर्व भी देश के उन संरक्षित क्षेत्रों में शामिल हैं, जहां से गुजर रही रेलवे लाइन वन्यजीवों के लिए काल बन रही है। अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि बीते साढ़े तीन दशक के वक्फे में ही इस रिजर्व व उससे लगे रेलवे ट्रैक पर 29 हाथियों की ट्रेन से कटकर मौत हो चुकी है। इसमें उत्तराखंड बनने के बाद से अब तक के 13 हाथी भी शामिल हैं। लगातार गहराती इस समस्या के निदान के मद्देनजर ही यहां सिस्मिक आधारित एडवांस एनिमल डिटेक्शन सिस्टम विकसित करने का निश्चय किया गया। केंद्र सरकार के उपक्रम सेंट्रल साइंटिफिक इन्स्ट्रूमेंटेशन आर्गनाइजेशन चंडीगढ़, भारतीय वन्यजीव संस्थान, विश्व प्रकृति निधि और राजाजी टाइगर रिजर्व इस पहल को मुकाम तक पहुंचाने में जुटे हैं। राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक पीके पात्रो बताते हैं कि देश में पहली बार वन्यजीव सुरक्षा के मद्देनजर सिस्मिक पर आधारित इस तकनीक का इस्तेमाल राजाजी में किया जा रहा है। इसके तहत कांसरो-मोतीचूर के बीच रेलवे ट्रैक के दोनों ओर करीब 200 मीटर के दायरे में सेंसर लगाए गए हैं। इनके जरिये किसी भी जानवर के वहां आने पर भूमि में होने वाली हलचल की तरंगें सिस्टम को मिलेंगी। तरंगों के घनत्व के आधार पता चलेगा कि वहां कौन सा जानवर है। इस कड़ी में पालतू हाथी को चलाकर इसका मापन करा लिया गया है। साथ ही अन्य छोटे जीवों को लेकर आने वाली तरंगों का भी आकलन कर लिया गया है। इन्हें नाम दिया गया है सिस्मिक सिग्नेचर। कंट्रोल रूम में लगे सिस्टम में सिस्मिक सिग्नेचर रिसीव होने पर सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाएगा। ऑटोमैटिक ही मैसेज के रूप में इसकी सूचना रिजर्व के कार्मिकों के साथ ही हरिद्वार रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर को जाएगी। इससे जहां रिजर्व का स्टाफ सतर्क हो जाएगा, वहीं स्टेशन मास्टर तब इस ट्रैक से गुजरने वाली ट्रेनों के लोको पायलट को गति सीमा नियंत्रित करने अथवा अन्य कदम उठाने को कहेंगे। जून मध्य तक काम करने लगेगा सिस्टम राजाजी रिजर्व के निदेशक पात्रों के मुताबिक इस सिस्टम को विकसित करने का कार्य पिछले आठ माह से चल रहा है। वर्तमान में डेमो भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जून मध्य तक यह सिस्टम काम करने लगेगा। हाथियों के साथ ही दूसरे वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज से यह कदम खासा अहम होगा।

Check Also

चारधाम यात्रा में पंजीकृत यात्रियों के नहीं पहुंचने पर अब दूसरों को मिलेगा दर्शन का मौका

देहरादून (सू0वि0) । उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2021 संचालन हेतु उत्तराखंड शासन के धर्मस्व विभाग द्वारा …

2 comments

  1. 504493 355014I conceive this site contains some rattling superb info for everybody : D. 921370

  2. 367839 593778Visiting begin a business venture about the internet usually indicates exposing your products or services moreover provider not only to some individuals inside your town, but however to plenty of future prospects who may be over the web several times. simple internet business 605073

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *