-मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लोकवाणी की 22वीं कड़ी में आज जनता से हुए रू-ब-रू
-स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका
-‘जिला स्तर पर विशेष रणनीति से विकास की नई राह‘ पर की बात
-असम की तरह जशपुर जिले में दिखने लगे हैं चाय के बागान
-महिला स्व-सहायता समूहों ने ई-कॉमर्स पर बेची 22 हजार 480 राखियां
-कुपोषित बच्चों की संख्या में 32 प्रतिशत की कमी
-अबूझमाड़ को बूझने की दिशा में राज्य सरकार ने की ठोस पहल: पहली बार मिलने लगा अबूझमाड़ क्षेत्र के ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का लाभ
रायपुर (जनसम्पर्क विभाग)। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि स्थानीय टैलेंट, स्थानीय युवा और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से हम विकास के छत्तीसगढ़ मॉडल को और ज्यादा विस्तार देंगे। इससे छत्तीसगढ़ का हर क्षेत्र समृद्ध और खुशहाल होगा। मुख्यमंत्री आज प्रसारित मासिक रेडियोवार्ता लोकवाणी की 22 वीं कड़ी में जनता से ‘जिला स्तर पर विशेष रणनीति से विकास की नई राह‘ विषय पर बातचीत कर रहे थे। इस विषय पर यह लोकवाणी की दूसरी कड़ी है। मुख्यमंत्री की मासिक रेडियो वार्ता लोकवाणी का प्रसारण आज आकाशवाणी के सभी केन्द्रों, एफ.एम. रेडियो और क्षेत्रीय समाचार चैनलों में किया गया।
श्री बघेल ने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डीएमएफ एवं मनरेगा से इसमें काफी मदद की जा सकती है। स्थानीय मौसम, मिट्टी और विशेषता को देखते हुए जिस तरह बीजापुर में मिर्ची की खेती का सपना साकार हो रहा है। वैसे ही अन्य जिलों में भी वहां की विशेषता के अनुसार बहुत से काम हो रहे हैं और इसमें बहुत बढ़ोत्तरी करने की संभावना है। जिला प्रशासन की पहल से अब जशपुर जिले में असम की तरह चाय के बागान दिखने लगे हैं। अबूझमाड़ में लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके इसके लिए गांवों का सर्वे कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ी भाषा में अपने उद्बोधन की शुरूआत करते हुए प्रदेशवासियों को नवरात्रि, दशहरा, करवा चौथ, देवारी, गौरा-गौरी पूजा, मातर, गोवर्धन पूजा, छठ पर्व, भाई-दूज आदि त्यौहारों की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के चारों कोनो में देवी माई के बड़े-बड़े मंदिर है। दंतेवाड़ा में दंतेश्वरी दाई, डोंगरगढ़ में बम्लेश्वरी दाई, रतनपुर में महामाया दाई, चंद्रपुर में चंद्रहासिनी दाई बिराजी हैं। नारी शक्ति के रूप में हम बेटियों की पूजा करते हैं और हमारे यहां कन्या भोज कराने की भी परंपरा है। उन्होंने कहा कि बेटियों और नारियों के प्रति सम्मान भाव के कारण हमारे यहां वर्ष में दो बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। बेटियों और नारियों के प्रति सम्मान का यह भाव हमें पूरी जिंदगी निभाना है। यहीं सही मायने में छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा है। हमें अपनी परंपरा और संस्कृति की शिक्षा से अपने जीवन में उतारना है। राज्य सरकार ने दाई-दीदी के अधिकार और उनके मान-सम्मान को बढ़ाने का प्रयास किया है।
नरवा योजना में 30 हजार नालों में होंगे जल संरक्षण और संवर्धन के कार्य
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की नरवा योजना के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि नरवा योजना के तहत प्रदेश के 30 हजार नालों में जल संरक्षण और संवर्धन का कार्य करने की शुरूआत की गई है। जिससे किसानों को पानी की चिंता से छुटकारा मिले। लोकवाणी में कोरबा जिले के ग्राम लबेद के श्री टीकाराम राठिया ने बताया था कि उनके गांव के नाले पर बने बांध से अब लगभग साढ़े तीन सौ एकड़ में किसान धान और साग-सब्जी की खेती कर रहे हैं। श्री बघेल ने कहा कि लबेद गांव में 25 साल पहले मिट्टी का बांध बनाकर पानी रोका गया था। जिला प्रशासन ने अच्छी पहल करते हुए 2 करोड़ 34 लाख रूपए की लागत से इस बांध का वैज्ञानिक ढंग से पुनरोद्धार और नवनिर्माण का कार्य कराया, जिससे इस बांध की सिंचाई क्षमता दोगुनी हो गई है। पहले जहां 210 एकड़ में पानी पहुंच पाता था, अब 419 एकड़ तक पानी पहुंच रहा है। लबेद और गिद्धकुंवारी के लोगों को इसका लाभ मिलने लगा है। इस बांध से लगी 800 मीटर की अंडर ग्राउंड नगर बनाई गई है। जिससे पानी अंतिम छोर तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि लबेद जलाशय परियोजना की सफलता से अन्य जिलों के लोगों को प्रेरणा मिलेगी।
आईआईटी रूड़की के सहयोग से नारायणपुर जिले के 19 ग्रामों का प्रारंभिक नक्शा एवं अभिलेख तैयार
श्री बघेल ने कहा कि अबूझमाड़ को ठीक ढंग से बूझने की दिशा में हमने ठोस कार्यवाही शुरू कर दी है। जल्दी ही इसका लाभ जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगेगा। लोकवाणी में अबूझमाड़ के नारायणपुर जिले के श्री सत्यनारायण ने बताया कि अबूझमाड़ क्षेत्र में राजस्व भूमि के सर्वे के बाद गांवों के लोगों की जमीन का पट्टा बन गया है। अब वे लोग धान बेच रहे हैं। भूमि का समतलीकरण किया गया है और उन्हें राज्य शासन की अन्य योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है। उन्होंने इसके लिए ग्रामवासियों की ओर से मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस संबंध में कहा कि अबूझमाड़ का मतलब ऐसा वन क्षेत्र जिसे बूझा नहीं जा सकता। जब हमारी सरकार आई मुझे लगा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि प्रदेश का कोई क्षेत्र अबूझा रह जाए, जहां की आशाओं को समझने जनसुविधाओं और विकास की योजनाओं को पहुंचाने की कोई व्यवस्था ही न हो। उन्होंने कहा कि जब जांच कराई गई तो पता चला कि नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखण्ड के 237 गांव और नारायणपुर विकासखंड के 9 गांव असर्वेक्षित हैं। जिसके कारण किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक ओरछा विकासखण्ड के चार तथा नारायणपुर विकासखण्ड के 9 गांवों का प्रारंभिक सर्वे पूर्ण कर उन्हें र्भुइंयां साफ्टवेयर के साथ जोड़ा गया है तथा छह अन्य ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य प्रक्रिया में है। आईआईटी रूड़की के सहयोग से 19 ग्रामों का प्रारंभिक नक्शा एवं अभिलेख तैयार कराया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन ने यह निर्णय लिया है कि सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक प्रारंभिक अभिलेख अथवा मसाहती खसरा को आधार बनाकर कब्जेदार को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाए। ओरछा विकासखण्ड से 1 हजार 92 तथा नारायणपुर विकासखण्ड से 1 हजार 842 ग्रामीणों ने विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन दिए हैं। इन आवेदनों पर कार्यवाही करते हुए पात्र हितग्राहियों को लाभ दिया जा रहा है।
जशपुर जिले के कांसाबेल, बालाछापर और गुटरी गांव में 60 एकड़ रकबे में चाय के बागान तैयार
श्री बघेल ने जशपुर जिले में चाय की खेती से ग्रामीणों को मिल रहे लाभ का जिक्र करते हुए कहा कि असम की तरह अब जशपुर में भी चाय के बगान दिखने लगे हैं। इसके पीछे स्थानीय समुदाय की ताकत है। जशपुर जिले के चाय के बागान लोगों की आय का बड़ा जरिया बनेंगे। जशपुर विकासखण्ड के सारूडीह गांव मंे चाय की खेती हो रही है। लोकवाणी में जशपुर निवासी श्री अशोक तिर्की ने मुख्यमंत्री से जानना चाहा कि जशपुर में चाय की खेती सफल हो सकती है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा कि संयुक्त वन प्रबंधन समिति सारूडीह के अंतर्गत स्व-सहायता समूह के अनुसूचित जनजाति के 16 परिवारों के सदस्यों से मिला जा सकता है, जिन्होंने जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत से 20 एकड़ क्षेत्र को चाय के बागान में बदल दिया है। यहां 20 एकड़ कृषि भूमि पर चाय का रोपण किया गया है। चाय रोपण के प्रबंधन एवं प्रसंस्करण में 2 महिला स्व-सहायता समूह जुड़े हैं। अब तो चाय रोपण से व्यापारिक स्तर पर ग्रीन टी एवं सी.टी.सी.टी का निर्माण किया जा रहा है। यहां निर्मित चाय की गुणवत्ता की जांच भी व्यावसायिक संस्थाओं से कराई गई है, जिसमें दोनों प्रकार की चाय को उत्तम गुणवत्ता का होना पाया गया है। इस चाय बागान में जैविक खेती को ही आधार बनाया गया है। इसके लिए हितग्राही परिवारों को उन्नत नस्ल का पशुधन भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे उनको अतिरिक्त लाभ हो रहा है। इसी तरह मनोरा ब्लॉक में कांसाबेल, जशपुर ब्लॉक में बालाछापर और गुटरी में भी 60 एकड़ रकबे में चाय के बागान तैयार हो गए हैं।
डीएमएफ मद के सदुपयोग के चमत्कारिक नतीजे
कबीरधाम जिले के श्री बंसत यादव ने डीएमएफ मद से किए जा रहे कार्याे की सफलता के बारे में मुख्यमंत्री से जानना चाहा। उन्होंने बताया कि कबीरधाम जिले में डीएमएफ मद से शिक्षित युवाओं को शाला संगवारी के रूप में रोजगार दिया जा रहा है। बाइक एम्बुलेंस तथा सुपोषण अभियान जैसे कामों में मदद की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमएफ की राशि वास्तव में उन क्षेत्रों की अमानत है, जहां खनन गतिविधियों के कारण पर्यावरण, स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षण, पोषण आदि गतिविधियों पर असर पड़ता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने डीएमएफ की राशि के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए, जिससे इस राशि का उपयोग वास्तव में खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के विकास में, पुनर्वास में हो सके। श्री बघेल ने कहा कि इस मद की राशि से कबीरधाम जिले में 100 से अधिक शिक्षित युवाओं को शाला संगवारी के रूप में रोजगार दिया जा रहा है। ग्रामीण और वन क्षेत्रों में संचालित स्वास्थ्य केन्द्रों में द्वितीय एएनएम के रूप में 80 से अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जा रहा है। साथ ही डीएमएफ के माध्यम से बड़ी राशि अधोसंरचना विकास के लिए दी गई है। जिला अस्पताल को अपग्रेड किया जा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों और हेल्थ स्टाफ की नियुक्ति की गई है। वन क्षेत्रों में बाईक एम्बुलेंस गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। कबीरधाम जिले में मातृत्व स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए मोटर बाइक एम्बुलेंस सेवा संचालित हो रही है। वन क्षेत्रों-जैसे दलदली, बोक्करखार, झलमला, कुकदूर, छीरपानी में इसका अच्छा असर हुआ है। इससे 2 हजार से अधिक गर्भवती माताओं को संस्थागत प्रसव कराने और उन्हें सुरक्षित घर छोड़ने में मदद मिली है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान में डीएमएफ की राशि का उपयोग काफी कारगर साबित हुआ है। कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त पौष्टिक आहार अंडा और केला देने की शुरुआत की गई। 1 से 3 वर्ष के बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्रों में गर्म भोजन दिया जा रहा है। जिले में 2019 के वजन तिहार के मुकाबले, वर्ष 2021 में कुपोषण की दर 19.56 प्रतिशत से घटकर 13 प्रतिशत हो गई है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। ऐसी ही रिपोर्ट हर जिले से मिल रही है। जिसके कारण प्रदेश में कुपोषित बच्चों की संख्या में 32 प्रतिशत की कमी आई है। हमें नई सोच और नए उपायों से छत्तीसगढ़ को पूर्णतः कुपोषण मुक्त राज्य बनाना है।
महिला समूहों का 13 करोड़ रूपए का कालातीत ऋण माफ
राजनांदगांव जिले के ग्राम मनगटा के प्रियंबिका स्व-सहायता समूह की सुश्री रामेश्वरी साहू ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वे स्वयं गौठान में वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण सहित विभिन्न गतिविधियों से जुड़ी है। उनके गांव की 28 समूहों की 50 दीदियों ने रक्षा बंधन पर्व पर धान, बीज, गेहूं, चावल, बांस की राखियों का निर्माण किया था। ई-कॉमर्स पर लगभग दो लाख 30 हजार से अधिक राशि की 25 हजार से अधिक राखियों का देश-विदेश में ऑनलाईन व ऑफलाईन विक्रय किया गया। उन्होंने बताया कि हम लोगों द्वारा बनाई गई राखी राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने अमेजान से मंगाकर आपको बांधी थी। उन्होंने कहा कि हम लोग द्वारा बनाई राखी पहनकर आपने हमारा मान-सम्मान बढ़ाया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों को मजबूत करने के लिए अनेक कदम उठाएं गए हैं। हमारी बहनों ने भी रोजगार मूलक कार्यों में दिलचस्पी दिखाई है। इसके साथ-साथ ही अपने गांव की सुरक्षा और कुरीतियों के खिलाफ जंग छेड़ने के साथ समूह की महिलाओं ने अनेक नवाचार किए हैं और अपने परिवार को स्वावलंबी बनाया है। तीजा-पोरा के अवसर पर महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा महिला कोष से लिए गए लगभग 13 करोड़ रूपए के कालातीत ऋण माफ किया गया। इससे अब वे नया ऋण ले सकेंगी। महिला कोष से महिला समूहों को दी जाने वाली राशि दो करोड़ रूपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रूपए कर दी गई है और ऋण सीमा को एक लाख से बढ़ाकर 2 लाख कर दिया गया है। इससे महिला समूहों को अपने कारोबार के विस्तार में कोई समस्या नहीं होगी। राजनांदगांव जिले के महिला समूहों द्वारा बनाई गई लगभग 22 हजार 480 राखियों का विक्रय ई-कॉमर्स के माध्यम से हुआ है। वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री भी ई-कॉमर्स पर करने की व्यवस्था की गई है, इससे महिला समूहों को नया बाजार मिलेगा।
जिलों में जनसमस्या निवारण की सुविधाजनक प्रणाली विकसित करें
सूरजपुर जिले की सुश्री गुरूचंदा ठाकुर ने सूरजपुर जिले में जनसमस्याओं के निवारण के लिए जिला प्रशासन द्वारा प्रारंभ किए गए जन संवाद कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी और गांव के अनेक लोगों की अनेक समस्याओं का समाधान इस नई व्यवस्था से हुआ है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा कि जिला स्तर पर की गई इस पहल का लाभ लोगों को मिल रहा है। आदिवासी अंचल और वन क्षेत्र होने के कारण आवागमन की दिक्कत भी है। जिसके कारण लोगों को सरकारी ऑफिस में पहुंचना कठिन होता है। सूरजपुर जिले में जन संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत कॉल सेंटर के माध्यम से जिला मुख्यालय में सभी विकासखण्ड मुख्यालयों की समस्याएं सुनी जाती हैं। फोन रिसीव किए जाते हैं और आवेदन की कापी व्हाट्सअप पर ली जाती है। ज्यादातर मामलों में 24 घंटे के भीतर समस्या का समाधान हो जाता है। कॉल सेंटर के माध्यम से राजस्व संबंधी सीमांकन, बटांकन, ऋण पुस्तिका, ऑनलाईन रिकार्ड आदि सारे काम हो रहे हैं। किसी को पेंशन में समस्या है, राशन कार्ड बनवाना है, नाम जुड़वाना है, सड़क, नाली, पुल-पुलिया, सामुदायिक भवन आदि की मांग है। पीडीएस दुकान, स्वास्थ्य केन्द्र के बारे में कुछ कहना है, जनपद में निर्माण संबंधी कार्यों के प्रस्ताव हों या भुगतान की समस्या। बिजली आपूर्ति को लेकर कोई शिकायत है। ऐसे सभी मामले इस प्रणाली से हल हो रहे हैं। मुझे खुशी है कि इस व्यवस्था से संतुष्ट लोग फोन करके जानकारी भी दे रहे हैं। इसीलिए मैंने पूरे प्रदेश में जिला प्रशासन को खुली छूट दी है कि वे मौलिक तरीके से या स्थानीय जरूरतों और विशेषताओं के अनुसार जनसमस्या निवारण की अपनी प्रणाली विकसित करें। ऐसे नवाचारों का खूब स्वागत है।
बीजापुर जिले के किसान मिर्ची की खेती से प्रति एकड़ कमाएंगे डेढ़ लाख रूपए
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साधन उपलब्ध कराने और लोगों को आर्थिक मदद देने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का लोकवाणी में उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में खेती-किसानी और परंपरागत रोजगार के अवसरों को मजबूत करने के अनेक उपाए किए जा रहे हैं जिससे लोगों को आर्थिक मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना, सुराजी गांव योजना, गोधन न्याय योजना, वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, लघु धान्य फसलें जिन्हें मिलेट्स कहा जाता है उनके उत्पादन और प्रसंस्करण की व्यवस्था, सिंचाई के लिए निःशुल्क पानी की व्यवस्था, कृषि ऋण माफी, सिंचाई कर माफी, पौनी-पसारी योजना जैसे अनेक कामों से गांव वालों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। हम हर समस्या का समाधान चाहते हैं।
बीजापुर जिले के चंदूर गांव के श्री देवर किष्टैया ने लोक वाणी में रिकॉर्ड किए गए संदेश के माध्यम से बताया कि गांव में बारहमासी रोजगार के अवसर नहीं होने के कारण अनेक ग्रामीण नदी पार तेलंगाना मिर्ची के खेतों में मिर्ची तोड़ाई के लिए जाते थे, लेकिन बचत नहीं हो पाती थी। नई सरकार आने के बाद जिला प्रशासन द्वारा मिर्ची की खेती के लिए दिए गए सहयोग से अब चंदूर तथा पड़ोसी गांव कोत्तूर और तारलागुड़ा में मिर्ची की खेती की जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा बीज खाद, पंप, नलकूप, ड्रिप सिस्टम, मल्चिंग, विद्युत एवं फेंसिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं निःशुल्क प्रदाय की गई है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजापुर जिले के चंदूर, तारलागुड़ा और कोत्तूर गांव में जिला प्रशासन द्वारा मिर्ची की खेती की जो पहल की गई है। इससे इन तीन गांवों में 155 एकड़ जमीन के स्वामी 78 किसान परिवारों को मिर्ची की खेती के लिए तैयार किया गया है। डीएमएफ एवं मनरेगा के माध्यम से खेतों की फेंसिंग, बीज, खाद, बोर, ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग एवं विद्युत आदि प्रारंभिक व्यवस्था करके नर्सरी तैयार कर ली गई है। इस तरह जो लोग पहले मूंग की खेती करके प्रति एकड़ लगभग 10 हजार रुपए कमाते थे, वे मिर्ची की खेती करके, एक से डेढ़ लाख रुपए तक प्रति एकड़ कमाएंगे। इसके अलावा मिर्ची तोड़ने के काम में स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार, बेहतर रोजी और अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी, जिससे वे अपने गांव, अपने घर और अपने परिवार में रहते हुए काफी राशि बचा सकेंगे।
The National News
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