Related Articles
Максимальные выигрыши с mostbet – ваш ключ к успеху10/21/2026
Hamster Run casino ile kazancını katla
10/20/2026
Hamster Run casino ile kazancını katla
10/20/2026

देहरादून (सू0वि0) । स्वामी दयानंद आश्रम, ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल डॉ0 के.के. पॉल व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ब्रह्मलीन पूज्य स्वामी दयानंद सरस्वती जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। राज्यपाल ने स्वामी जी की पुण्य स्मृति में नमन करते हुए कहा कि पूज्य स्वामी दयानंद सरस्वती जी ज्ञान, दर्शन व आध्यात्मिकता की अद्भुत मिसाल थे। अध्यात्म के साथ ही मानव जाति की सेवा में भी उनका अविस्मरणीय योगदान रहा है। स्वामीजी ने ज्ञान-दर्शन व सेवा भाव का जो रास्ता हमें दिखाया है, उस पर चलकर ही मानव कल्याण सम्भव है। मेरा परम सौभाग्य है कि सितम्बर 2015 में प्रधानमंत्री जी के साथ आश्रम में आने पर मुझे स्वामीजी का आशीर्वाद मिला था। राज्यपाल ने पूज्य स्वामीजी द्वारा समय-समय पर विभिन्न अवसरों पर दिए गए व्याख्यानों व व्यक्त किए गए विचारों के संकलन पर आधारित ग्रन्थ का विमोचन भी किया। राज्यपाल ने इसे पुनीत कार्य बताते हुए कहा कि ये ग्रन्थ समाज का दिशा निर्देश करने के साथ ही मानव उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान करेगा। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यता है। अन्य समकालीन सभ्यताओं में से बहुत सी सभ्यताएं पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। यह भारतीय सभ्यता ही है जो कि 5 हजार वर्षों से अपना मौलिक स्वरूप बनाए हुए है। धर्म, अध्यात्म व मूल्य आधारित व्यवस्था ही वे ताकतें हैं जिनके कारण भारतीय सभ्यता सदियों से कभी न रूकने वाली धारा की तरह लगातार प्रवाहित हो रही है। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय सभ्यता को बहुत सी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। सबसे पहले 8 वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने समाज को ऐसी कठिन परिस्थितियों से बाहर निकाला। 15 वीं व 16 वीं शताब्दी में गुरू नानक, तुलसीदास, कबीर, मीरा बाई, सूरदास, चैतन्य महाप्रभु व अन्य संत कवियों ने हमारा मार्ग प्रशस्त किया। बाद में 19 वीं शताब्दी में श्री रामकृष्ण, स्वामी विवेकानंद, ब्रह्म समाज, आर्य समाज, प्रार्थना समाज ने समाज को राह दिखाई। राज्यपाल ने कहा कि 19 वीं शताब्दी के चुनौतिपूर्ण समय में श्री रामकृष्ण ने वेदांत के ‘‘प्राणिमात्र की सेवा ही ईश्वर की सेवा है’’ के संदेश के साथ हिंदु धर्म को फिर से नई ऊर्जा दी। वेदांत, हिंदु धर्म की आधारशिला है। वेदांत ज्ञान की पराकाष्ठा है, हिंदु संतों की पवित्र बुद्धिमत्ता है, सत्य के मनीषियों का श्रेष्ठ अनुभव है। यह वेदों का निष्कर्ष है। बौद्ध काल के पश्चात शंकरा परम्परा में 10 उपनिषदों व भगवद्गीता की व्याख्या की गई। इन सारगर्भित व्याख्याओं को ज्ञान के साधकों तक पहुंचाने में दयानंद आश्रम का महत्वपूर्ण योगदान है। राज्यपाल ने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों व विद्वानों के हजारों वर्षों के गहन चिंतन से रचित वेद, उपनिषद, महाकाव्य, पुराण आदि महान मार्गदर्शी रचनाएं, मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। हमारा दायित्व है कि हम अपने अध्यात्म, ज्ञान व दर्शन की विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संजो कर रखें। विश्व शांति, विश्व कल्याण और विश्वबंधुत्व की भारतीय दर्शन की अवधारणा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पूरी दुनिया के लिए और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। वेदांतों में वर्णित ज्ञान से सम्पूर्ण मानवता का कल्याण सम्भव है। स्वामी दयानंद सरस्वती जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भारत, भारतीयता एवं हिन्दुत्व की रक्षा में स्वामी जी का योगदान भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर में स्वीकार्य है। जब भारत एवं भारत की संस्कृति की बात होती है तो उनका स्मरण स्वाभाविक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी परम्परा आदि शंकराचार्य से प्रारंभ हुई, जिसे अग्रदूत के रूप में आगे बढ़ाने का कार्य स्वामी जी ने किया। आज उनके लाखों भक्त इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत की संस्कृति में प्रहार हो रहे हैं। स्वामी जी के अनुयायी निश्चित रूप से ऐसा नहीं होने देंगे। मैं इस अवसर पर स्वामी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनके द्वारा दिया गया ज्ञान हम सब का आगे भी मार्गदर्शन करता रहेगा
The National News
551248 557086Good post, properly put together. Thanks. I will probably be back soon to check out for updates. Cheers 74750
741441 650374Thank you for this. Thats all I can say. You most definitely have made this into something thats eye opening and essential. You clearly know so significantly about the subject, youve covered so numerous bases. Excellent stuff from this part with the internet. 973372