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डॉ निशंक ने तकनीकी शिक्षण संस्थानों के निदेशकों से की ऑनलाइन चर्चा

नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने आज यहाँ पर वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए देश भर के आईआईटी, आईआईआईटी, एनआईटी, आईआईएसईआर, आईआईएससी जैसे तकनीकी शिक्षण संस्थाओं के निदेशकों के साथ उनके संस्थानों में कोविड प्रबंधन, ऑनलाइन शिक्षा एवं नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के कार्यान्वयन पर विस्तृत चर्चा की.

इन संस्थानों के जिन कर्मचारियों की कोरोना की वजह से मृत्यु हो गई उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए माननीय मंत्री जी ने सभी संस्थानों के प्रमुखों से कहा कि इस महामारी ने हमसे हमारे प्रियजनों एवं मित्रों को छीन लिया है लेकिन अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम आईआईटी, आईआईआईटी, एनआईटी, आईआईएसईआर, आईआईएससी के छात्रावासों में रह रहे 21,360 विद्यार्थियों की सुरक्षा, वायरस का रोकथाम और परिसरों को कोविड मुक्त बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं.

इस महामारी के दौरान सभी तकनीकी शिक्षण संस्थानों द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों की प्रशंसा करते हुए माननीय मंत्री जी ने कहा, “आप सभी देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित संस्थानों में से हैं और इस चुनौतीपूर्ण समय में भी आप सब ने मिलकर अपने ज्ञान और अनुसंधान के द्वारा इस महामारी में लड़ने के लिए नए नए प्रयोग कर के बहुत सारे उपकरण एवं अन्य चीज़ें बनाई जो कि बेहद उल्लेखनीय है. मुझे बेहद प्रसन्नता है कि कोविड से लड़ने के लिए लॉकडाउन की अवधि के दौरान प्रतिष्ठित संस्थानों ने कम लागत वाले पोर्टेबल वेंटिलेटर, सस्ती कोविड टेस्ट किट, सैनिटाइजेशन के लिए ड्रोन, विशेषीकृत डिजिटल स्टेथोस्कोप, मेक-शिफ्ट आइसोलेशन वार्डों के लिए डिस्पोजेबल बांस-फर्नीचर और “संक्रमण प्रूफ फैब्रिक” का निर्माण किया है.”

इसके अलावा उन्होनें सभी संस्थानों द्वारा किए गए इनोवेशन एवं कोरोना से लड़ाई में किए गए सहयोग की प्रशंसा की.

कोरोना के बावजूद नई उपलब्धियों को हासिल करने के लिए इन संस्थानों की प्रशंसा करते हुए डॉ निशंक ने कहा, “हमने पिछले एक साल में कोविड से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद कई उपलब्धियां हासिल की हैं जैसे उच्चतर शिक्षा का लैंगिक समानता सूचकांक वर्ष 2019-20 में बढ़कर1.01 हो गया. इसके अतिरिक्त, तकनीकी शिक्षा में छात्राओं का नामांकन बढ़ाने के लिए हमने अतिरिक्त संख्या में सीटें बढ़ाईं. परिणामस्वरूप, एनआईटी में महिलाओं की कुल संख्या, जो वर्ष 2017-18 में 14.17% थी, वह वर्ष 2019-20 में बढ़कर 17.53% हो गई. इसी तरह, आईआईटी में यह संख्या वर्ष 2016 में 8% थी, जो वर्ष 2019-20 में बढ़कर18% हो गई. एआईसीटीई ने भी तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने वाली छात्राओं की सहायता के लिए ‘प्रगति छात्रवृत्ति’ योजना लागू की है, जिसके तहत प्रतिवर्ष 4000 छात्रवृत्तियां प्रदान की जा रही हैं.”

इसके अलावा उन्होनें शिक्षा मंत्रालय द्वारा ऑनलाइन शिक्षा को प्रोत्साहित एवं प्रमोट करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी विस्तार से सभी को बताया और इस चुनौतीपूर्ण समय के दौरान आईआईटी, एनआईटी, एआईसीटीई जैसी संस्थानों द्वारा विद्यार्थियों के लिए निरंतर शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए किए गए प्रयासों की भी प्रशंसा की.

इसके अलावा माननीय मंत्री जी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में बात की और सभी से कहा कि कोरोनावायरस की दूसरी लहर ने भारत को बुरी तरह प्रभावित किया है लेकिन इसकी वजह से हमें छात्र-कल्याण के कार्यों से पीछे नहीं हटना है और यह सुनिश्चित करना होगा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन का काम तय समय सीमा में पूरा हो जाए.

केंद्रीय मंत्री ने सभी शिक्षण संस्थानों के निदेशकों से कहा कि आज देश में कोरोना से लड़ने के लिए हर व्यक्ति, संस्थान और सामाजिक वर्ग को आगे आकर अपना योगदान देना होगा और इसकी शुरुआत हम व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों स्तरों पर कर सकते हैं. उन्होनें कहा, “आप सभी संस्थान स्थानीय प्रशासन के सम्पर्क में बने रहें और उन्हें जो भी सहयोग आप दे सकते हैं, वह दें जैसे कि आप सभी के पास छात्रावास सुविधाएँ है जिन्हें अस्थायी तौर पर आइसोलेशन केंद्रों के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अतिरिक्त आप सभी अपने तकनीक और डाटा मैनेजमेंट के कक्ष से स्थानीय प्रशासन को ऑनलाइन समाधान दे सकते हैं जिससे जमीनी स्तर पर चीजों को व्यवस्थित किया जा सके.”

माननीय मंत्री जी ने सभी से आग्रह किया कि वे अपने इनोवेटिव विचारों और समाधानों के साथ आगे आएं ताकि इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में विजय प्राप्त की जा सके.

 

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