नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (ञ्जरूष्ट) इस समय अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से जूझ रही है। पार्टी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने सोमवार को अचानक पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा देकर सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया है। सुखेंदु शेखर रॉय पिछले एक दशक से अधिक समय से संसद में टीएमसी का मुख्य चेहरा रहे हैं, इसलिए उनका यह कदम ममता बनर्जी के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके इस्तीफे के तुरंत बाद एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें टीएमसी के पांच अन्य सांसद शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व), प्रसून बनर्जी (हावड़ा), जगदीश बसुनिया (कूचबिहार), कालिपद सोरेन (झारग्राम) और अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा) उनके साथ खड़े नजर आ रहे हैं, जिससे साफ है कि बगावत की स्क्रिप्ट काफी पहले से लिखी जा रही थी।
दिल्ली में शुभेंदु अधिकारी से मिले 20 बागी सांसद, लोकसभा स्पीकर के पास पहुंचे
सुखेंदु शेखर के इस्तीफे के तुरंत बाद दिल्ली में राजनीतिक हलचलें तेज हो गईं। टीएमसी के करीब 20 बागी लोकसभा सांसदों ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से एक बेहद अहम और गुप्त बैठक की। इस मुलाकात के बाद इन बागी सांसदों ने सीधे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का दरवाजा खटखटाया है। सांसदों के इस समूह ने स्पीकर को एक पत्र सौंपकर मांग की है कि संसद में उनके गुट को टीएमसी से अलग एक स्वतंत्र संसदीय दल (ब्लॉक) का दर्जा दिया जाए और उसी के अनुसार सदन में उनकी सीटों का आवंटन भी बदला जाए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन सांसदों ने खुलकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (हृष्ठ्र) में शामिल होने की इच्छा जाहिर कर दी है, जिससे दिल्ली से लेकर कोलकाता तक की राजनीति गरमा गई है।
विधानसभा के बाद अब संसद में बगावत, ममता बनर्जी के हाथ से खिसकी कमान
यह नया घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में हुए हालिया विद्रोह के महज कुछ दिनों बाद ही सामने आया है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही बंगाल विधानसभा में टीएमसी के 58 विधायकों ने पार्टी आलाकमान के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था। इन विधायकों ने ममता बनर्जी के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय का नाम खारिज करते हुए विपक्ष के नेता पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया था, जिन्हें बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता भी दे दी थी। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष की आग सुलग रही थी, जो अब सांसदों की इस खुली बगावत के रूप में बाहर आ गई है।
शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नए सियासी समीकरण, टीएमसी आलाकमान में सन्नाटा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति अब एक बिल्कुल नए मोड़ पर आ खड़ी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य में एक नई राजनीतिक ताकत आकार ले रही है, जो टीएमसी के तमाम असंतुष्ट और उपेक्षित नेताओं को अपने पाले में एकजुट करने का काम कर रही है। यदि ये 20 सांसद औपचारिक रूप से पार्टी का साथ छोड़ देते हैं, तो लोकसभा में टीएमसी का वजूद बेहद कमजोर हो जाएगा। इस पूरे महासंकट पर फिलहाल टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी या पार्टी आलाकमान की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और डैमेज कंट्रोल के लिए जल्द ही कोई सख्त या बड़ा फैसला ले सकती हैं।
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