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बेटी ने रची मां की मौत की साजिश! पहली कोशिश नाकाम, फिर 130 की रफ्तार से स्कॉर्पियो चढ़ाकर की हत्या का आरोप

जयपुर। जयपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की कर्मचारी नीरज शर्मा की मौत के मामले में पुलिस जांच के दौरान लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जिस घटना को शुरुआत में सड़क हादसा माना जा रहा था, उसे अब पुलिस पूर्व नियोजित हत्या की साजिश मानकर जांच कर रही है। पुलिस का दावा है कि नीरज शर्मा की हत्या की कोशिश एक बार नहीं, बल्कि दो बार की गई थी। पहली कोशिश नाकाम रहने के बाद आरोपियों ने रणनीति बदलकर दूसरी बार कथित रूप से सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार, 3 जुलाई को हुई घटना से पहले आरोपियों ने नीरज शर्मा को उनके घर के बाहर किराए की महिंद्रा थार से कुचलने की योजना बनाई थी। हालांकि, उस दिन वह बच गईं। इस घटना के बाद नीरज को अपने पीछे किसी के लगे होने का संदेह हुआ और उन्होंने सुरक्षा के मद्देनजर घर के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए।
सीसीटीवी लगने के बाद बदली गई योजना
जांच में सामने आया है कि घर के बाहर कैमरे लगने के बाद आरोपियों ने घटनास्थल बदलने का फैसला किया। कथित साजिशकर्ताओं ने ऐसी जगह हमला करने की योजना बनाई, जहां वारदात को सड़क हादसा साबित करना आसान हो और किसी को शक न हो।
बेटी के फोन के बाद बदला रास्ता
पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन नीरज शर्मा अपने 16 वर्षीय दिव्यांग बेटे को कोचिंग छोड़कर लौट रही थीं। इसी दौरान उनकी बेटी आयुषी शर्मा ने उन्हें फोन कर किसी जरूरी काम का हवाला देते हुए घर वापस बुलाया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि जैसे ही नीरज ने अपना रास्ता बदला, पहले से निगरानी कर रहे लोगों ने स्कॉर्पियो सवार हमलावरों को संकेत दे दिया।
130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मारी टक्कर
पुलिस जांच के अनुसार, स्कॉर्पियो करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पीछे से आई और नीरज शर्मा की स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह करीब 100 फीट दूर जा गिरीं। शुरुआती दौर में इस घटना को सड़क दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई।
अनुकंपा नौकरी और 5 बीघा जमीन बना कथित साजिश का कारण
पुलिस के अनुसार, परिवार में विवाद की शुरुआत नीरज शर्मा के पति विजय कुमार शर्मा की मृत्यु के बाद हुई। विजय कुमार राजस्थान हाईकोर्ट में एलडीसी थे। परिवार ने दिव्यांग बेटे के भविष्य को देखते हुए अनुकंपा नियुक्ति नीरज शर्मा को दिलाने का निर्णय लिया था। जांच में सामने आया कि बेटी आयुषी इस फैसले से नाराज थी और बाद में अपने चाचा मोहन स्वरूप के घर रहने लगी।
पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान मोहन स्वरूप और उसके फरार बेटे बलराम ने आयुषी को अपने पक्ष में कर लिया। जांच में यह भी सामने आया है कि आयुषी ने आगरा हाईवे पर स्थित करीब 5 बीघा पैतृक जमीन में हिस्सा अपने चाचा और चचेरे भाई के नाम करने का कथित वादा किया था। पुलिस का मानना है कि संपत्ति और अनुकंपा नौकरी का विवाद ही इस कथित साजिश की मुख्य वजह बना।
डिजिटल सबूतों से खुली साजिश की परतें
पुलिस का कहना है कि शुरुआत में आयुषी ने खुद को एक दुखी बेटी के रूप में पेश किया, लेकिन मोबाइल फोन का डेटा, डिजिटल रिकॉर्ड, आपसी संदेश और पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों ने मामले की दिशा बदल दी। इन्हीं सबूतों के आधार पर पुलिस अब इस मामले को पूर्व नियोजित हत्या मानते हुए आगे की जांच कर रही है। साथ ही फरार आरोपियों की तलाश भी तेज कर दी गई है।
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