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आज भी तलाश रही हैं इन्दिरा को भारत माता की सूनी आँखें (कविता)

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सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला द्वारा रचित- 
Virendra Dev Gaur Chief Editor (NWN)

इन्दिरा प्रियदर्शिनी गॉधी

पूरे देश को महान प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी जी के बलिदान दिवस के लिए एक मामूली भेंट

खूब लड़ी मरदानी
वह तो
नेहरू जी की बेटी थी
भारत के लोगों ने
उसमें
लक्ष्मी बाई देखी थी।
इकहत्तर की लड़ाई में
दुर्गा बनकर
जिहादिस्तान की कमर तोड़ी थी
सन् पैंसठ की जीत में
माँ दुर्गा ने
सुनहरी कड़ी जोड़ी थी।
देश का शौर्य
बढ़ाने में माँ ने
कोई कसर नहीं छोड़ी थी
इस महारानी लक्ष्मीबाई की सवारी
न कोई घोड़ा
न कोई घोड़ी थी।
अखंडता पर
जब-जब देश की
आँच कभी कोई आई थी
तब-तब वीरांगना ने
दुश्मन पर
प्रलयंकारी बिजली गिराई थी।
दुर्गा माँ
कहती थी मेरी
खून का अपने कतरा-कतरा बहा देंगी
राष्ट्र की अखंडता के यज्ञ में
सर्वस्व अपना लुटा देंगी।
खूब लड़ी मरदानी
वह तो
कमला जी की बेटी थी
विश्व ने
उसकी आँखों में
त्याग ओर बलिदान की
चिनगारी देखी थी।
इन्दिरा प्रियदर्शिनी बनकर
नेहरू जी की
गोदी में वह खेली थी
बापू जी ने भी उसकी
हर अठखेली देखी थी।
खूब लड़ी मरदानी
वह तो
नेहरू जी की बेटी थी
बांग्लादेश की
जननी थी वह
भारत माता की
लाड़ली अलबेली बेटी थी।
-इति

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